राजनीति अब केवल अवसरवाद
अब भारत की राजनीति में धारा दक्षिणपंथ या धर्मनिरपेक्षता या वामपंथ की नहीं है। न ही हिंदुत्व की है। 2026 की मौजूदा राजनीति में अब केवल अवसरवाद है। वही सर्वोपरी है। विचार और सिद्धांत समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन सत्ता के सामने ये सब स्थगित है। ... 2014 और 2019 की लगातार जीतों ने भाजपा को समय दिया है। और समय ही राजनीति की ही सबसे बड़ी पूँजी है। संसद का मानसून सत्र इस महीने शुरू होगा। लेकिन जो संसद बैठेगी, वह पूरी तरह वही संसद नहीं होगी जिसे देश ने 2024 के आम चुनाव में चुना था। मतदाताओं ने...