जम्मू-कश्मीर : बकरीद में ‘गाय’ की कुर्बानी पर रोक लगाने के बाद धार्मिक संगठनों ने जताई आपत्ति

जम्मू-कश्मीर | Cow not be sacrificed : अगले हफ्ते ईद-उल-अजहा ( बकरीद ) का त्योहार देशभर में मनाया जाएगा. इस बार कोरोना का लगातार प्रकोप औऱ लॉकडाउन के कारण लोगों की आर्थिक हालत खासा अच्छी नहीं है. यहीं कारण है कि व्यपारियों में उत्साह की कमी देखी जा रही है. इन्हीं सबके बीच जम्मू-कश्मीर से एक बड़ी खबर आ रही है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने ईद-उल-अजहा के पहले एक आदेश जारी किया है. इस, आदेश में कहा गया है कि बकरीद के मौके पर गायों और ऊंटों को अवैध रूप से मारने पर रोक लगा दी गई है. इस संबंध में पशु और मत्स्य पालन विभाग ने संभागीय आयुक्तों और आईजी को पत्र लिखकर बकरीद के मौके पर गायों, बछड़ों और ऊंटों को मारने पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है. श्रीनगर: कोरोना की वजह से बकरीद( ईद उल-अज़हा) से पहले बकरा व्यापारियों को परेशानी हो रही है। एक व्यापारी ने बताया, “मैंने अच्छा माल लाया फिर भी अच्छी खरीदारी नहीं हो रही है। कोरोना की वजह से लोगों के पास पैसे नहीं इसलिए खरीदारी कम हो रही है। हमने बकरों के दाम भी कम कर दिए हैं।” pic.twitter.com/p3MMo4DD75 — ANI_HindiNews (@AHindinews) July 17, 2021 भेड़, गाय, बछड़ों और ऊंटों की… Continue reading जम्मू-कश्मीर : बकरीद में ‘गाय’ की कुर्बानी पर रोक लगाने के बाद धार्मिक संगठनों ने जताई आपत्ति

दिग्विजय का डटना और कांग्रेस का हौसला

digvijay singh protest : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जब एक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे तो उन्हें बेरिकेट्स लगाकर पुलिस ने रोका। 74 साल के दिग्विजय बेरिकेट्स पर चढ़ गए। पुलिस ने लाठियां मारीं। तेज पानी की बौछारें फैंकीं। मगर दिग्विजय डटे रहे। तेज पानी की धार ने उन्हें पीछे धकेला। मगर दिग्विजय फिर पलट कर आए। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए वह भारी हौसला बढ़ाने वाला क्षण था। आज राहुल गांधी और प्रियंका के अलावा कांग्रेस का और कौन सा नेता ऐसा है जो सड़कों पर आकर इस तरह संघर्ष कर रहा हो? कैमरा उन दृश्यों के पीछे खुद भागता है मगर न्यूज चैनल उन्हें नहीं दिखा पाते। कैमरामेन निराश हो जाते हैं कि ऐसे जीवंत फुटेज भी नहीं लिए। मगर उन्हें समझाया जाता है कि यह विपक्ष के नेता के थे। इन्हें नहीं दिखाया जा सकता। ऐसा ही कुछ रविवार को भोपाल में हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जब एक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे तो उन्हें बेरिकेट्स लगाकर पुलिस ने रोका। 74 साल के दिग्विजय बेरिकेट्स पर चढ़ ( digvijay singh protest ) गए। पुलिस ने लाठियां मारीं। तेज पानी की… Continue reading दिग्विजय का डटना और कांग्रेस का हौसला

कौन है कश्मीरी हिंदुओं के पलायन का दोषी?

पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने अन्य विषयों के साथ, घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुर्नवास की मांग भी रखी। क्या यह सत्य नहीं कि तीन दशक पहले जिस कुत्सित मानसिकता ने लगभग पांच लाख कश्मीरी पंडितों को पलायन हेतु विवश किया, वह मजहबी घृणा से प्रेरित जिहाद था और घाटी में व्याप्त इको-सिस्टम दशकों से उसी चिंतन से जनित है? क्या उसी दर्शन को घाटी में पुष्ट करने या फिर उसपर अपनी आंख मूंदे रहने के लिए यही 14 नेता किसी न किसी रूप में जिम्मेदार नहीं? जम्मू-कश्मीर को लेकर 23 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश के 14 नेताओं के साथ बैठक हुई। तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने अन्य विषयों के साथ, घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुर्नवास की मांग भी रखी। क्या यह सत्य नहीं कि तीन दशक पहले जिस कुत्सित मानसिकता ने लगभग पांच लाख कश्मीरी पंडितों को पलायन हेतु विवश किया, वह मजहबी घृणा से प्रेरित जिहाद था और घाटी में व्याप्त इको-सिस्टम दशकों से उसी चिंतन से जनित है? क्या उसी दर्शन को घाटी में पुष्ट करने या फिर उसपर अपनी आंख मूंदे रहने के लिए यही 14 नेता किसी न किसी रूप में जिम्मेदार नहीं?… Continue reading कौन है कश्मीरी हिंदुओं के पलायन का दोषी?

कश्मीरी पंडितों की सरकार से नाराजगी

कश्मीरी पंडित ( kashmiri pandits  ) केंद्र सरकार से नाराज हैं। पहली बार उन्होंने कई तरह से अपनी नाराजगी जाहिर की है। भाजपा के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 24 जून को कश्मीर के नेताओं का साथ हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वदलीय बैठक को लेकर यह मुद्दा उठाया और कहा कि इसमें कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों को नहीं बुलाया गया। हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना कश्मीरी पंडित हैं लेकिन वे भाजपा की नुमाइंदगी कर रहे थे। कश्मीरी पंडितों के समूहों का कहना है कि उनके प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाया जाना चाहिए था ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। दिल्ली में कश्मीरी पंडितों के सरोकारों की नुमाइंदगी करने वालों में से एक सुशील पंडित ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कश्मीर में पंडितों का नरसंहार हुआ था और लाखों कश्मीरी पंडित ( kashmiri pandits ) शरणार्थी बन गए लेकिन यह चर्चा का मुद्दा नहीं है। ध्यान रहे प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद इकलौते नेता थे, जिन्होंने कश्मीरी पंडितों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस की ओर पांच सूत्री मांग पेश करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों को वापस घाटी में बसाने की योजना पर बात होनी चाहिए। यह… Continue reading कश्मीरी पंडितों की सरकार से नाराजगी

Myanmar Army Cruelty म्यांमार में सैन्य बर्बरता

Myanmar Army Cruelty म्यांमार की सेना अब गांवों में आगजनी कर रही है। उसने 2017 में भी सैकड़ों गांवों में आग लगा दी थी। उस समय वह रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ मुहिम चला रही थी। अब ये तरीका बाकी आबादी के खिलाफ अपनाया जा रहा है। जाहिर है, विश्व समुदाय लाचार होकर सब देख रहा है। म्यांमार में सेना क्रूरता से बर्बरता ( Myanmar Army Cruelty म्यांमार ) की तरफ बढ़ रही है। अब खबर यह है कि उसने उन गांवों को जलाना शुरू कर दिया है, जहां के लोगों ने सैनिक शासन के विरोध में जारी आंदोलन को अपना समर्थन दिया। पिछले हफ्ते एक ऐसे गांव को जलाने की खबर दुनिया भर में चर्चित हुई। उसके मुताबिक मागवे क्षेत्र में स्थित किन मा गांव में आग लगा दी गई। इस गांव की आबादी 800 है। ताजा खबर के बाद अब ये इल्जाम लगा है कि सेना विरोधी आंदोलनकारियों को दंडित करने के लिए गांवों में सामूहिक सजा दी जा रही है। इसी सिलसिले में गांवों में आगजनी की गई है। किन मा में हुई घटना से सेना ने इनकार नहीं किया। उसने सिर्फ यह कहा कि आग उसने नहीं लगाई। आग आतंकवादियों ने लगाई, जिसका दोष उस पर मढ़ दिया… Continue reading Myanmar Army Cruelty म्यांमार में सैन्य बर्बरता

किसान इमरजेंसी का विरोध क्यों कर रहे हैं?

केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में करीब सात महीने से आंदोलन कर रहे किसान 26 जून को इमरजेंसी की बरसी के मौके पर देश भर में विरोध प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस पार्टी के नेता इससे परेशान हुए हैं। उनको लग रहा है कि उन्होंने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया और अब किसान कांग्रेस को ही शर्मिंदा करने का काम कर रहे हैं। सवाल है कि किसान क्यों ऐसा कर रहे हैं? क्या संयुक्त किसान मोर्चा में राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी और योगेंद्र यादव के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और उनके आपसी विवाद की वजह से ऐसा हो रहा है? या केंद्र सरकार किसानों से बातचीत की पहल करने जा रही है और सरकार के साथ किसी किस्म की सहमति बनी है, जिसके बाद किसान कांग्रेस को शर्मिंदा करने वाला काम कर रहे हैं? यह भी पढ़ें: कांग्रेस ने अपना नुकसान किया देर-सबेर इसका पता चल जाएगा कि किसान क्यों ऐसा कर रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर किसानों की मंशा कांग्रेस को शर्मिंदा करने की है तो उन्होंने जून के पहले हफ्ते में ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर प्रदर्शन क्यों नहीं किया? ध्यान रहे आंदोलन कर रहे किसानों में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा… Continue reading किसान इमरजेंसी का विरोध क्यों कर रहे हैं?

इमरजेंसी विरोधी दिवस मनाएंगे किसान नेता

चंडीगढ़। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ करीब सात महीने से आंदोलन कर रहे किसानों ने 26 जून को इमरजेंसी विरोधी दिवस मनाने का ऐलान किया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चे की इस घोषणा से कांग्रेस पार्टी के नेता खासे खफा और निराश हुए हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी ने किसानों के इस आंदोलन का जम कर समर्थन किया है। भाजपा भी आरोप लगाती रही है कि आंदोलन कांग्रेस का खड़ा किया हुआ है। पर अब किसानों ने कांग्रेस के खिलाफ ही प्रदर्शन की योजना बनाई है। किसान आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन होने के बावजूद संयुक्त किसान मोर्चा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को तानाशाह शासक बताते हुए 26 जून को इमरजेंसी की बरसी पर पूरे देश में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि इसको किसान आंदोलन के नेताओं की आपसी खींचतान का नतीजा भी बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि किसानों ने अपने आंदोलन को अराजनीतिक दिखाने के लिए यह पैंतरा चला है। इस बीच यह भी खबर है कि सरकार किसानों से बातचीत करके आंदोलन खत्म कराने का रास्ता निकालना चाहती है। बहरहाल, किसानों के इस ऐलान का हरियाणा के कांग्रेस नेताओं ने… Continue reading इमरजेंसी विरोधी दिवस मनाएंगे किसान नेता

Rajasthan: पायलट की Flight करेगी Take Off ! मिलने पहुंचे 8 विधायकों ने कहा हम साथ हैं..

जयपुर । राजस्थान में मौसमी तापमान के साथ ही सियासी तापमान भी एक बार फिर से बढ़ने लगा है. आज सचिन पायलट के खेमे के 8 विधायकों ने उनसे मुलाकात की. विधायकों ने मुलाकात के बाद कहा कि हम कांग्रेस में हैं और कांग्रेस में रहकर ही अपनी आवाज उठाएंगे. विधायकों का कहना था कि सचिन पायलट ने कांग्रेस पार्टी के लिए काफी संघर्ष किया है उन्हें बोलने का हरसंभव मौका दिया जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा हो नहीं सका है इसीलिए काफी नाराजगी है. आज कांग्रेस के जिन 8 विधायकों ने सचिन पायलट से मुलाकात की उम्र में राजेश पारीक, जी आर खटाना, रामनिवास गावड़िया, गुरदीप सिंह, मुकेश भाकर, पीआर मीना, वेद प्रकाश सोलंकी और विश्वजीत सिंह शामिल थे. कांग्रेस में रहकर ही करेंगे विरोध मुलाकात के बाद लौटते हुए विधायक मुकेश भाकर और रामनिवास गावड़िया ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हमने कल दौसा में आयोजित कार्यक्रम के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि कल स्वर्गीय राजेश पायलट की पुण्यतिथि है तो हम अपने जिलों और ब्लॉक में रहकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे. मुकेश भाकर ने कहा कि हम सचिन पायलट के साथ मजबूती के साथ खड़े हैं और किसी भी कीमत पर इधर-उधर होने वाले… Continue reading Rajasthan: पायलट की Flight करेगी Take Off ! मिलने पहुंचे 8 विधायकों ने कहा हम साथ हैं..

एक उम्मीद तो जगी

म्यांमार की हालत के बारे में दुनिया में एक तरह का असहाय होने का भाव रहा है। म्यांमार के सैनिक शासक बेरहमी से लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों की जान लेते रहे हैं, लेकिन बाहरी दुनिया से वहां किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं हुआ है। पश्चिमी देशों ने जो पहल की उसे चीन और रूस ने नाकाम कर दिया। म्यांमार के सैनिक शासकों को अलग लगता हो कि इन दो बड़ी ताकतों के हाथ उनकी पीठ पर हैं, तो यह गलत नहीं है। इसीलिए एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशन्स (आसियान) की पहल से एक हलकी से उम्मीद जगती दिखी है। उसने म्यांमार के संकट को हल करने के लिए जो पहल की है, उस पर पश्चिमी देशों और चीन में सहमति बन सकने के शुरुआती संकेत दिखे हैं। आसियान की योजना को असल में बड़ा बल तब मिला, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आसियान के बयान की भाषा के अनुरूप अपील जारी की। सुरक्षा परिषद ने अपने बयान की भाषा इस रूप में तैयार की गई, जिससे चीन और रूस को कोई आपत्ति ना हो। सुरक्षा परिषद ने आसियान से कहा कि वह अपने फैसले के मुताबिक म्यांमार के लिए अपना दूत तुरंत नियुक्त करे। यानी एक तरह से परिषद ने… Continue reading एक उम्मीद तो जगी

क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

will indias myanmar policy change : अब क्या म्यांमार के प्रति भारत की नीति बदलेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अमेरिका के एसएंडपी डाउ जोंस के इंडेक्स से अडानी पोर्ट एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन को हटाने का फैसला किया गया है। डाउ जोंस की ओर से कहा गया है कि 15 अप्रैल को एपीएसईजेड को इंडेक्स से हटा दिया जाएगा क्योंकि कंपनी के कारोबारी रिश्ते म्यांमार की सेना के साथ हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक मानव अधिकारियों का गंभीर उल्लंघन किया है। गौरतलब है कि म्यांमार में चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करके सत्ता हासिल करने और उसके बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की हत्या कर रहे सैन्य शासन के खिलाफ अमेरिका ने पहले से पाबंदी लगाई हुई है। देवास जिला ने जीती कोरोना से जंग, पिछले 9 दिनों में एक भी मरीज नहीं अमेरिका की पाबंदी के बाद से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि अडानी समूह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि कंपनी यंगून में जो बंदरगाह बना रही है उस प्रोजेक्ट में सेना के कई अधिकारी की साझेदारी वाली कंपनियां भी शामिल हैं। म्यांमार इकोनॉमिक होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड और म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ जुड़े कोई 10 सैन्य… Continue reading क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

भारत की विदेश नीति खत्म!

बहुत बुरा लगा अपनी ही प्रजा पर गोलियां चलाने वाली सेना के साथ भारतीय सेना की उपस्थिति की खबर सुन कर! उफ! क्या हो गया है भारत? हम किन मूल्यों, आदर्शों और संविधान में जीते हुए हैं? जो हमारा धर्म है, हमारा संविधान है, हमारी व्यवस्था है, उसमें कैसे यह संभव जो हम खूनी के साथ खड़े हों। खूनी का, लोगों का कत्लेआम करने वाली सेना, तानाशाही का भारत हौसला बढ़ाए यह हम भारतीयों के लिए, दुनिया के कथित सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात है या जिंदा रहने की बात? पता नहीं आपने जाना या नहीं कि प्रजा के खून से रंगी म्यांमारी सेना के 27 मार्च के सालाना दिवस के समारोह में भारतीय सेना के प्रतिनिधिसैनिक अटैची ने तानाशाह सेनापति का हौसला बढ़ाया। दुनिया में भारत की खबर बनी। फालतू का तर्क है कि जब बर्मा याकि म्यांमार से कूटनीतिक संबंध है तो डिफेंस अटैची को सेना की परेड में जाना ही होगा। खूनी सेनापति को सैल्यूट मारनी होगी। पर क्या अमेरिका, ब्रिटेन व यूरोपीय संघ के लोकतांत्रिक देशों के म्यांमार से कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं? म्यांमार में जब इनके दूतावास हैं और इन्होंने सेना की परेड में उपस्थिति दर्ज नहीं… Continue reading भारत की विदेश नीति खत्म!

किसान आंदोलन के विरोध में उतरे स्थानीय निवासी

कृषि कानून के खिलाफ किसानों का 80 दिन से विरोध प्रदर्शन चल रहा है, ऐसे में गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन के कारण स्थानीय सड़क बन्द है। जिससे आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।

हस्तक्षेप यह ईश्वरीय!

याद करें सन् 2011 को! पांच साल राज कर मनमोहन सरकार 2009 में लोकसभा चुनाव जीती हुई थी। सरकार का इकबाल भरपूर था। कॉमनवेल्थ खेल जैसी वैश्विक धूम थी।

मुक्ति-वाहिनियों को पुनर्नमन का समय

मरते रहें तो भी मारने के लिए हाथ नहीं उठाने की राह पर चलते रहना आसान नहीं होता है।

तभी घटनाएं भी अनियंत्रित

लोकसभा चुनाव में छप्पर फाड़ जीत के बाद लग रहा था कि भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम देश के सोशल, पॉलिटिकल व इकोनॉमिक नैरेटिव को कंट्रोल किए रहेगी।

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