आंदोलन की जीत के बाद नागरिक हार क्यों जाता है?
उस छात्र की स्थिति सोचिए जिसकी परीक्षा रद्द हुई। उसका भविष्य अधर में है। वह अगली परीक्षा की तैयारी करे या अदालत के फैसले का इंतजार? उसके परिवार ने कोचिंग पर जो पैसा खर्च किया, उसका क्या होगा? एक वर्ष की पढ़ाई, मेहनत और अवसर का हिसाब कौन देगा? कानून कहता है कि दोषी को पांच से दस वर्ष की सजा होगी। मगर दोषी कब पकड़ा जाएगा? मुकदमा कब पूरा होगा? और तब तक छात्र को क्या राहत मिलेगी? भारत में परीक्षा सुधार का कानून इसी विरोधाभास का एक उदाहरण है। सरकार कानून बनाती है। सजा बढ़ाती है। समयसीमा तय...