प्रतिरोध प्रतीकात्मक ही रहे!
न्यायालय की ताजा टिप्पणियों से इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता कि आखिर कोई जन समूह आंदोलन करने पर मजबूर क्यों होता है, और अगर प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन से बात नहीं सुनी जाती, तो उसे क्या करना चाहिए? संविधान से मिले असहमति जताने और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के अधिकार के बारे में सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी दरअसल इस बुनियादी हक को बेहद सीमित दायरे में बांध देने वाली है। उसका संदेश है कि लोग प्रतिरोध करें, लेकिन प्रतीकात्मक तौर पर उसे जता कर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लौट जाएं! मुख्य निर्वाचन आयुक्त विरोधी प्रदर्शनों से संबंधित एक याचिका पर...