राज्यों के चुनाव हैं सभ्यतागत संघर्ष नहीं
चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव वैसे तो दोनों सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों के साथ साथ मजबूत प्रादेशिक क्षत्रपों और वामपंथी पार्टियों के लिए परीक्षा वाले हैं। लेकिन ये चुनाव खासतौर से भाजपा के लिए परीक्षा वाले इसलिए हैं क्योंकि इनके नतीजों से पता चलेगा कि भाजपा गैर कांग्रेस दलों और प्रादेशिक क्षत्रपों के मुकाबले अपनी चिरंतन कमजोरी से उबर पाई है या नहीं। यह भी पता चलेगा कि क्षेत्रीय और भाषायी अस्मिता वाले राज्यों में भाजपा की अखिल भारतीय राजनीति के दांव पेंच, व्यापक हिंदू ध्रुवीकरण और राष्ट्रवाद की राजनीति कारगर होती है या नहीं। ध्यान...