ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी और राइट विंग सोशल मीडिया हैंडल्स से फैलाई जा रही अफवाहों पर ममता बनर्जी की पार्टी ने चुप्पी साध ली। ममता की पार्टी ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। उसने अलग तरह से अफवाहें फैलाईं। पहले तो ममता की पार्टी के आईटी सेल से जुड़े एक व्यक्ति ने पोस्ट करके कहा कि भाजपा के 12 में से आठ सांसद ममता बनर्जी के संपर्क में हैं और चुनाव नतीजों के बाद पाला बदल कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। इसके बाद सोशल मीडिया पोस्ट का सिलसिला शुरू हो गया। पुरानी तस्वीरें साझा की गईं।
एक तस्वीर दीघा में जगन्नाथ धाम मंदिर के उद्घाटन की थी, जहां भाजपा के दिग्गज नेता दिलीप घोष मौजूद थे और ममता बनर्जी के साथ थे। गौरतलब है कि उस समय तक उनके पार्टी छोड़ने की चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में उनको अमित शाह ने बुलाया और पार्टी के काम में लगाया।
बहरहाल, ऐसी पुरानी तस्वीरों के जरिए तृणमूल कांग्रेस ने माहौल बनाना शुरू किया। दूसरे और आखिरी चरण के मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस के कई हैंडल्स से यह खबर भी चली कि भाजपा के चुनाव लड़ रहे कई उम्मीदवार तृणमूल के संपर्क में हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने खुद एप्रोच की है और कहा है कि वे जीते तो पार्टी छोड़ कर तृणमूल में शामिल हो जाएंगे। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के 77 विधायक जीते थे लेकिन बाद में उनमें से करीब 10 विधायक पाला बदल कर तृणमूल कांग्रेस के साथ चले गए थे।
इस बार कहा जा रहा है कि अगर ममता बनर्जी जीतती हैं तो वे भाजपा के सांसदों और विधायकों को तोड़ने की ज्यादा कोशिश करेंगी ताकि राष्ट्रीय स्तर पर अपना नेतृत्व स्थापित करने में उनको मदद मिले। वे यह दिखाना चाहेंगी कि जो तरीका भाजपा अपनाती है वे भी उस तरीके की माहिर खिलाड़ी हैं। दूसरी ओर भाजपा समर्थकों का कहना है कि अगर इस बार बंगाल में पार्टी जीती तो ममता बनर्जी की पार्टी को तोड़ कर उसे समाप्त करने .या बहुत कमजोर करने का प्रयास करेगी ताकि उनकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को समाप्त किया जा सके।


