पहचान या विचार पर आधारित दल नहीं टूटते
यह बड़ा वाजिब सवाल है कि कुछ पार्टियां सत्ता से बाहर होते ही क्यों टूट जाती हैं, जबकि कुछ पार्टियां लंबे समय तक सत्ता के बगैर रहने के बावजूद नहीं टूटती हैं और अगर टूटती भी हैं तो उससे अलग होने वाला समूह कामयाब नहीं हो पाता है? चार साल के अंदर उद्धव ठाकरे की शिव सेना के दो बार टूटने और सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के टूट जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है। इसका जवाब बहुत मुश्किल नहीं है। लेकिन जवाब या निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले पार्टियों को अलग...