west bengal politics

  • बांग्ला अस्मिता के दांव की काट नहीं

    भारतीय जनता पार्टी बांग्ला अस्मिता के दांव की काट नहीं खोज पा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी ने यह कार्ड बहुत होशियारी से खेला था। उस समय चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर उनके चुनाव का प्रबंधन देख रहे थे। उन्होंने खेला होबे का नारा दिया और साथ ही जय श्रीराम के बरक्स जय मां काली का नारा भी लगवाया। इस बार फिर ममता बनर्जी मां माटी मानुष के नारे पर काम कर रही हैं। उन्होंने 21 जुलाई को शहीद दिवस के कार्यक्रम में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का एजेंडा तय कर दिया। उन्होंने फिर से...

  • ममता अभी से तैयारी में लग गईं

    बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की बारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कह दिया है कि बिहार के बाद पश्चिम बंगाल और असम में गहन पुनरीक्षण होगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। उसके बाद देश के अलग अलग हिस्सों में मतदाता सूची की सफाई का काम होगा। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों को इसके लिए तैयार रहने को कहा है। चुनाव आयोग को अब सुप्रीम कोर्ट का भी साथ मिल गया है। बिहार में पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली...

  • गांगुली ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली

    भारतीय क्रिकेट टीम के सर्वकालिक महान कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव आ रहे हैं और इससे पहले की पार्टियां उनको राजनीति में घसीटने या अपनी पार्टी में शामिल करने का अभियान चलाएं उन्होंने कह दिया है कि वे राजनीति में नहीं जाना चाहते हैं। हालांकि पहले भी वे कई बार यह बात कह चुके हैं और सभी पार्टियों के नेताओं की निजी बातचीत में भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनको राजनीति में नहीं जाना है। फिर...

  • दिलीप घोष क्या भाजपा छोड़ने वाले हैं?

    पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के सामने एक बड़ा संकट आता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा को तोड़ने की कोशिश में हैं। हालांकि इसमें कितनी कामयाबी मिलेगी यह नहीं कहा जा सकता है लेकिन फिलहाल एक नाम ऐसा दिख रहा है, जो अपनी पार्टी से दूरी बनाए हुए है। वह नाम है पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद दिलीप घोष का। वे पिछले कुछ दिनों से पार्टी से नाराज चल रहे हैं। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में...

  • अभिषेक विदेश में, देश में ममता पर हमला

    तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पार्टी के नंबर दो नेता अभिषेक बनर्जी विदेश में हैं। पहलगाम हमले के बाद हुई सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का पक्ष दुनिया को बताने गए सरकारी डेलिगेशन में अभिषेक भी गए हैं। ममता बनर्जी ने खुद इस अभियान के लिए अपने भतीजे का चयन किया। सरकार ने तो पहली बार के सांसद यूनुस पठान को चुना था। उधर अभिषेक दुनिया के देशों के बीच भारत का पक्ष रख रहे हैं और भारतीय सेना के शौर्य का गुणगान कर रहे हैं तो इधर देश में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी को...

  • ठीकरा फोड़ने की ममता की राजनीति

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को एक बार जिस दांव से सफलता मिल चुकी है वे फिर उसी दांव को आजमाने का प्रयास कर रही हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने फिर बांग्ला अस्मिता का दांव चला है और इस बार भी निशाने पर अमित शाह हैं। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2021 में ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बाहरी बता कर बांग्ला बनाम बाहरी का दांव खेला था। उन्होंने भाषा और धर्म दोनों का इस्तेमाल किया था। ममता बनर्जी...

  • शिक्षकों के मामले में ममता, राहुल एक साथ

    पश्चिम बंगाल के 25 हजार से ज्यादा शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द करने के हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद राज्य में राजनीति तेज हो गई है। ध्यान रहे पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों की नियुक्ति रद्द होने का बड़ा असर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की राजनीति पर पड़ेगा। चूंकि ममता सरकार के मंत्री रहे पार्थ चटर्जी इस मामले में पकड़े गए हैं और उनके ठिकानों पर छापेमारी में 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी जब्त हुई है। इसलिए...

  • कल्याण बनर्जी पर गिरेगी गाज

    महुआ मोइत्रा के खिलाफ कल्याण बनर्जी की नाराजगी सबको पता है। लेकिन इस बार वे सिर्फ उनसे नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता सौगत राय और भाजपा, कांग्रेस से होकर तृणमूल में आए सांसद कीर्ति आजाद से भी लड़ लिए हैं। इसके अलावा पार्टी के कई और नेताओं ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोला है। ऊपर से वक्फ संशोधन बिल पर विचार करने वाली संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी में उन्होंने जो नाटक किए थे उससे भी उनके बारे में अच्छी धारणा नहीं है। संसद परिसर में नरेंद्र मोदी की नकल उतार कर भी वे काफी...

  • सुवेंदु नहीं संभाल पा रहे हैं विधायकों को

    पश्चिम बंगाल में 2021 में भारतीय जनता पार्टी के 77 विधायक जीते थे लेकिन अब उसके पास 65 विधायक बचे हैं। नौ विधायकों ने पाला बदल कर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया तो बाकी विधायक लोकसभा का चुनाव लड़ कर सांसद बन गए। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल ने भाजपा को एक और झटका दिया है। उसकी दो बार की विधायक तापसी मंडल ने पार्टी छोड़ दी है और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। वे पहले सीपीएम में थीं और उनको पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल के नेता...

  • अभिषेक बनर्जी पर कार्रवाई की चिंता नहीं

    पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी सीबीआई ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद और ममता बनर्जी की भतीजे अभिषेक बनर्जी का नाम आरोपपत्र में शामिल  किया है। सीबीआई की ओर से दायर एक पूरक आरोपपत्र में उनका नाम शामिल किया गया है। पहले दिन पार्टी ने इसका विरोध किया और इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। लेकिन उसके बाद पार्टी ने इस मामले की अनदेखी करने का रास्ता अपनाया है। तृणमूल कांग्रेस अगले साल होने वाले चुनावों के लिए दूसरे राजनीतिक अभियान में लग गई है। वह मतदाता सूची की जांच...

  • बंगाल में भाजपा को चेहरे की तलाश

    bjp west bengal : पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और उससे पहले भारतीय जनता पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व करने के लिए एक चेहरे की तलाश फिर शुरू हो गई है। पिछले कई बरसों से भाजपा बंगाल के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश कर रही है, जिसके दम पर वह ममता बनर्जी को चुनौती दे सके। भाजपा को यह बात समझ में आ गई है कि ममता बनर्जी बांग्ला अस्मिता के जिस दांव पर चुनाव लड़ती हैं उसकी काट अभी उसके पास नहीं है। पार्टी के अपने जो पुराने नेता हैं, जिनमें राहुल सिन्हा से लेकर...

  • अभिषेक की भूमिका क्यों नहीं बढ़ा रहीं ममता?

    यह बड़ा सवाल है, जिस पर कोलकाता से लेकर दिल्ली तक चर्चा होती है। सबको पता है कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी हैं। लेकिन ममता एक सीमा से आगे उनकी भूमिका नहीं बढ़ाती हैं। वे पार्टी के सांसद हैं और महासचिव हैं। लेकिन जिस तरह से देश के दूसरे प्रादेशिक क्षत्रपों ने अपने उत्तराधिकारियों को अपने जीवनकाल में ही सरकार में स्थापित किया उस तरह से ममता बनर्जी नहीं कर रही हैं। उलटे अगर कोई इस तरह की बात करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई कर दी...

  • अधीर रंजन चौधरी बने रहेंगे बागी

    कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया है। अधीर रंजन चौधरी की जगह शुभंकर सरकार को कांग्रेस ने नया अध्यक्ष बनाया है। लोकसभा चुनाव हारने के साथ ही अधीर रंजन चौधरी का नेता प्रतिपक्ष का पद समाप्त हो गया था और अब वे अध्यक्ष पद से भी हटा दिए गए हैं। इसके बावजूद उनके बागी तेवर कायम रहेंगे। उन्होंने कह दिया है कि ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ उनका अभियान जारी रहेगा। यह बात उन्होंने इसके बावजूद कही है कि राज्य के नए प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने ममता बनर्जी की सरकार की तरह दोस्ती का...

  • विपक्षी नेताओं से आगे आगे राज्यपाल

    पश्चिम बंगाल में ऐसा लग रहा है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भाजपा, कांग्रेस और लेफ्ट यानी समूचे विपक्ष से आगे आगे चलने का फैसला किया है। वे राज्य के साझा विपक्ष से बड़ा विपक्ष खुद बनना चाहते हैं। तभी उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर ऐसी बात कही है, जिसका कोई सिर पैर नहीं है या जिसे राजनीतिक व सामाजिक दोनों नजरिए से सही नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा है कि वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामाजिक बहिष्कार करेंगे। इसका क्या मतलब है? क्या वे मुख्यमंत्री से नहीं मिलेंगे? किसी राजनीतिक या सामाजिक कार्यक्रम में अगर...

  • भाजपा ने बंगाल में हार मान ली!

    भारतीय जनता पार्टी ने क्या मान लिया है कि वह पश्चिम बंगाल में नहीं जीत सकती है? यह सवाल इसलिए है क्योंकि प्रदेश भाजपा के नेताओं के बयान अब बहुत घबराहट वाले आने लगे हैं। पहले विधायक दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुस्लिम समुदाय को अलग थलग करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए नारे पर ही सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि इस नारे की बजाय कहना चाहिए कि जो हमारे साथ है उसका विकास। हालांकि प्रदेश का कोई भी भाजपा नेता उनके इस बयान पर उनके साथ नहीं आया। पिछले कुछ समय से वे अकेले ही...

  • बंगाल में टकराव बनाए रखने की रणनीति

    ऐसा लग रहा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस और राज्यपाल व मुख्यमंत्री लगातार टकराव बनाए रखना चाहते हैं। राजनीतिक रूप से यह रणनीति सबसे पहले ममता बनर्जी ने इस्तेमाल की थी। जब वे कांग्रेस में थीं तब भी 24 घंटे और 365 दिन तक की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ टकराव बनाए रखती थीं। जब उन्होंने अपनी पार्टी बना ली तब टकराव तेज कर दिया। लगातार टकराव बनाए रखने की रणनीति के कारण ही वे कांग्रेस के होते हुए लेफ्ट के विकल्प के तौर पर स्थापित हुईं और आखिरकार 2011 में चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बनीं। ऐसा...

  • ममता के लोग भाजपा को मौका दे रहे

    पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता और उनके पाले हुए गुंडे बेकाबू हो रहे हैं, जिससे भारतीय जनता पार्टी को राजनीति करने का मौका मिल रहा है। संदेशखाली में शेख शाहजहां की कथित गुंडागर्दी का मामला अभी ताजा था कि उत्तरी दिनाजपुर के दीघलगांव की नई घटना सामने आ गई है, जिसमें ताजेमुल हक नाम का तृणमूल कांग्रेस का एक नेता एक पुरुष और महिला की बेरहमी से पिटाई कर रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने एक और वीडियो साझा किय, जिसमें एक व्यक्ति...

  • अधीर रंजन चौधरी की छुट्टी हो सकती है

    पश्चिम बंगाल के कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी पहली बार लोकसभा का चुनाव हारे हैं और अब उनकी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले संकल्प किया था कि वे अधीर रंजन को हरवाएंगी और उनका संकल्प पूरा हो गया। अब कांग्रेस पार्टी किसी तरह से ममता के साथ तालमेल करना चाहती है। संसद के अंदर तृणमूल कांग्रेस के साथ समन्वय के लिए कांग्रेस के बड़े नेता काम कर रहे हैं। कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक पी...

  • ममता चुपचाप नहीं बैठी हैं

    ममता बनर्जी ने लगातार दो बार भाजपा को शिकस्त दी। पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में। इसके बावजूद वे चुपचाप नहीं बैठी हैं। उन्होंने भाजपा को कमजोर करने की मुहिम जारी रखी है। उनका ध्यान उत्तरी बंगाल पर है, जहां भाजपा ने अपना आधार मजबूत किया है। भाजपा के नेता इस इलाके को अलग राज्य बनवाने की भी बातें करते रहते हैं। इस इलाके में भाजपा को 2019 में बड़ी जीत मिली थी। विधानसभा चुनाव में भी कूचबिहार की आठ में से छह सीटों पर भाजपा जीती थी। लेकिन 2024 में ममता बनर्जी...

  • खड़गे ने क्यों अधीर को निशाना बनाया?

    यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी पर तीखा हमला किया। उन्होंने यहां तक कहा कि गठबंधन के बारे में फैसला करने में अधीर रंजन की कोई हैसियत नहीं है। खड़गे ने मुंबई में कहा कि गठबंधन में कौन रहेगा और कौन जाएगा इसका फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। हैरान करने वाली बात यह है कि खुद ममता बनर्जी ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का तालमेल अधीर रंजन चौधरी की वजह से नहीं हो पाया। यानी कम से कम बंगाल और...

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