west bengal politics

  • बैठक से पहले ममता के सांसद टूटेंगे!

    विपक्षी पार्टियों की एक अहम बैठक सोमवार, आठ जून को होने वाली है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि उससे पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों में टूट होगी। जानकार सूत्रों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी योजना के तहत ऐसा करा रही है ताकि ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक को पंक्चर किया जाए और उसका नैरेटिव बनने से रोका जाए। ध्यान रहे ममता बनर्जी की पार्टी के विधायक पहले ही टूट चुके हैं। उनके 80 में से 60 विधायकों ने अलग गुट बना लिया और विधानसभा स्पीकर ने इस गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता...

  • दो विधायकों का तृणमूल तोड़ने का दावा

    कोलकाता। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए दो विधायकों और कुछ अन्य नेताओं ने पार्टी तोड़ने का दावा किया है। इससे पहले पार्टी से निकाले गए ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने सोमवार को तृणमूल के कई विधायकों के साथ बैठक की थी। इन दोनों ने स्पीकर से शिकायत की है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता चुनने वाली चिट्ठी पर उन्होंने दस्तखत नहीं किया है। दोनों का कहना है कि उनके दस्तखत जाली हैं। इस मामले की जांच सीआईडी कर रही है और आठ जून को अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया है।...

  • अभिषेक के लिए मुश्किलें बढ़ गईं

    पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भाजपा के देवांशु पांडा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक लाख से ज्यादा वोट से जीत का दावा किया था और भाजपा उम्मीदवार की जीत वैसी ही बड़ी हुई है। चुनाव मैदान छोड़ कर हटे तृणमूल कांग्रेस के जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे और जमानत जब्त हो गई। यह सीट तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के चुनाव क्षेत्र डायमंड हार्बर के तहत है। अभिषेक डायमंड हार्बर मॉडल की बात करते थे और दावा करते थे कि इस मॉडल को भाजपा दस जनम...

  • ममता के बाद अभिषेक के गढ़ पर नजर

    शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी का गढ़ तोड़ दिया है। पिछली बार यानी 2021 में तो ममता बनर्जी नंदीग्राम लड़ने गई थीं, जो शुभेंदु अधिकारी का गढ़ है। वहां भी वे चुनाव हार गईं। इस बार शुभेंदु उनके गढ़ में लड़ने आए थे और भबानीपुर सीट पर उनको हरा दिया। इस तरह शुभेंदु ने ममता का गढ़ तोड़ा। कोलकाता को लेकर तो तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा था कि भाजपा एक भी सीट जीत जाएगी तो वे सिर मुंडवा लेंगे। वहां भाजपा ज्यादातर सीटों पर जीत गई। ममता बनर्जी के कई मंत्री कोलकाता में चुनाव...

  • जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं वे आजाद हैं: ममता

    कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी चुनाव में मिली हार के झटके से उबर रही हैं और उन्होंने फिर से पार्टी नेताओं को एकजुट करना शुरू कर दिया है। ममता ने पार्टी नेताओं के साथ एक बैठक की और उनसे संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की अपील की। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अगर कोई नेता टीएमसी छोड़ कर दूसरी पार्टी में जाना चाहता है तो वह आजाद है। ममता ने पार्टी नेताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा, ‘हम पार्टी दफ्तरों को दोबारा खोलेंगे, उन्हें रंगेंगे और मजबूती से काम पर लौटेंगे। जरूरत पड़ी तो...

  • मतदान से पहले असहाय ममता

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी तरह से असहाय दिख रही हैं। इस बार उन्होंने चुनाव प्रचार लड़ने भिड़ने के अंदाज में शुरू किया था। पिछले चुनाव यानी 2021 का विधानसभा चुनाव उन्होंने निरीहता के अंदाज में लड़ा था। अपने को दीदी की बजाय बंगाल की बेटी की तरह प्रोजेक्ट किया और लगभग पूरा चुनाव व्हील चेयर पर बैठ कर लड़ा। इस बार उनके तेवर अलग थे। उन्होंने पहले दिन से टकराव का तरीका चुना। ममता ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला और एसआईआर के खिलाफ पांच दिन तक धरना दिया। इसके बाद ईडी ने उनकी पार्टी के...

  • बंगाल में 21 अप्रैल तक मतदाता सूची में नाम जुड़ेगा

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कमाल हो रहा है। 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 सीटों के लिए मतदान होना है और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 21 अप्रैल तक चुनाव आयोग पूरक मतदाता सूची जारी करे। सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार, 16 अप्रैल को कहा कि 21 अप्रैल तक उन मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाए, जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल में फैसला हो गया है। जिन लोगों की अपील पेंडिंग हैं, उन्हें वोट डालने की इजाजत नहीं होगी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में 90.83 लाख वोटर्स के...

  • अधीर रंजन को अपने ही लोगों से लड़ना है

    पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के सबसे दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर मुश्किल लड़ाई में फंसे हैं। वे लगातार पांच बार जीतने के बाद पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे। ममता बनर्जी ने गुजरात के क्रिकेटर यूसुफ पठान को उनके खिलाफ उतारा और खुद मुर्शिदाबाद में बैठ कर उनको हरवाया। अब अधीर बाबू 36 साल के बाद विधानसभा का चुनाव लड़ने उतरे हैं। एक समय उनका ऐसा जलवा रहा है कि मुर्शिदाबाद जिले में आने वाली तीन लोकसभा सीटों, बहरामपुर, जंगीपुर और मुर्शिदाबाद के नतीजे उनके हिसाब से तय होते थे। लेकिन अब अपनी विधानसभा सीट पर समस्या...

  • बंगाल में ममता की मेहनत रंग लाई

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संतुष्ट होंगी। हालांकि जब अंतिम मतदाता सूची आएगी तब उसको लेकर विरोध होगा और उनकी पार्टी लोगों के नाम कटने के आरोप लगाएगी। लेकिन हकीकत है कि ममता बनर्जी ने लड़ भिड़ कर और कोलकाता से दिल्ली तक प्रदर्शन करके अनुपात से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटने की संभावना को खत्म कर दिया। अभी तक की जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची में से करीब 10 लाख नाम और कट सकते हैं। यह अधिकतम सीमा है। ज्यादा संभावना करीब सात लाख नाम कटने की है। फिर भी कुछ जानकार कह रहे...

  • सड़क से अदालत तक

    कोलकाता की घटना संघीय ढांचे के चरमराने का संकेत है। संबंधित पक्ष ऐसे विवादों से सड़कों पर निपटने लगें, तो उसका अर्थ है कि बात संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में नहीं रह गई है। आखिर इस तरह की नौबत क्यों आई? कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय के छापे का मुकाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सड़क पर उतर कर किया। ऐसा शायद पहली बार हुआ, जब एक केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई के बीच किसी मुख्यमंत्री ने इस तरह का दखल दिया हो। उस घटना के बाद से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने इसको लेकर एक बड़ा राजनीतिक...

  • ममता से टकराव कहां तक जाएगा?

    वैसे पश्चिम बंगाल में भाजपा ने स्थायी टकराव बनाया है। उसके नेता शुभेंदु अधिकारी लगातार ममता बनर्जी की सरकार और उनकी पार्टी के खिलाफ लड़ते रहते हैं। य़ह ममता बनर्जी वाली राजनीति का ही विस्तार है। उन्होंने इसी तरह लेफ्ट शासन के खिलाफ लगातार आंदोलन किया था। लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने ममता के खिलाफ टकराव बढ़ा दिया है। उनकी पार्टी के लिए चुनाव प्रबंधन का काम संभालने वाली एजेंसी आईपैक के कार्यालय और उससे जुड़े लोगों के घरों पर ईडी की छापेमारी ने ममता बनर्जी को मौका दिया कि वे भाजपा के खिलाफ सड़क पर...

  • मतुआ मतदाताओं को बरगला रहे हैं मंत्री

    पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा राजनीति अगर किसी एक जाति को लेकर हो रही है तो वह मतुआ समुदाय है। इसकी आबादी को लेकर भी कई तरह के भ्रम फैलाए गए हैं। मोटे तौर पर मतुआ आबादी 50 से 60 लाख है लेकिन एक से तीन करोड़ तक का दावा किया जाता है। 2011 की जनगणना के हिसाब से मतुआ आबादी 35 लाख थी। असल में पश्चिम बंगाल में 18 फीसदी दलित आबादी है, जिसमें सबसे ज्यादा 21 फीसदी राजबंशी हैं और उसके बाद 18 फीसदी के करीब नामशूद्र हैं, जिनमें मतुआ आते हैं। मतुआ समुदाय के लोग आजादी के...

  • जीना चाहते हैं इसलिए बीजेपी चाहते हैं

    कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल दौरे में शनिवार को यह नारा दिया। मतुआ समाज की बहुलता वाले ताहेरपुर में एक रैली को वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्ला भाषा में कहा ‘बाचते चाई, ताई बीजेपी चाई’। इसका मतलब है कि जीना चाहते हैं इसलिए बीजेपी चाहते हैं। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने अगले साल अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के चुनाव अभियान का आगाज कर दिया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी दो दिन के बंगाल और असम दौरे पर हैं। पहले दिन उनको ताहेरपुर में रैली को संबोधित करना था।...

  • बांग्ला भद्रलोक के वोट की राजनीति

    नितिन नबीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के देश की राजनीति पर कोई असर हो या नहीं हो लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसके असर की चर्चा शुरू हो गई है। ध्यान रहे नितिन नबीन कायस्थ हैं और कायस्थों की मौजूदगी पूर्वी भारत के राज्यों में ही है। बिहार, झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ठीक ठाक संख्या में कायस्थ हैं। आबादी कम होने के बावजूद कायस्थ इन राज्यों की राजनीति को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते रहते हैं। बीजू पटनायक और उनके बेटे नवीन पटनायक का लंबे समय तक ओडिशा में राज रहा...

  • बंगाल की लड़ाई बंगाल से बाहर हारेगी भाजपा!

    यह बात भारतीय जनता पार्टी के कई नेता खुद मानते हैं कि पश्चिम बंगाल की लड़ाई भाजपा वहां जमीन पर नहीं, बल्कि बाहर हारती है। इस बार भी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के नेता मान रहे हैं कि जमीन पर बदलाव के हालात हैं। लोग ममता बनर्जी की सरकार से उबे हुए हैं। हिंदू परेशान हैं और किसी तरह से बदलाव चाहते हैं। लेकिन समस्या यह है कि भाजपा के नेता इस तरह के काम करते हैं या इस तरह की बयानबाजी करते हैं, जिससे ममता बनर्जी को बंगाल की अस्मिता का मुद्दा बनाने का मौका मिल जाता है...

  • हुमायूं कबीर के खिलाफ उतरी भाजपा

    इस बात का इंतजार छह दिसंबर से हो रहा था कि कब भारतीय जनता पार्टी सामने आकर तृणमूल से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर से बाबरी मस्जिद बनवाने पर बयान देती है। पार्टी अब खुल कर इसके विरोध में आ गई है। भाजपा के नेता अर्जुन सिंह खुल कर कहा है कि इस बाबरी मस्जिद का भी वही हस्र होगा, जो अयोध्या वाली मस्जिद का हुआ था। ध्यान रहे भाजपा अगर मैदान में उतर कर हुमायूं कबीर का विरोध नहीं करती तो बाबरी मस्जिद का मुद्दा नहीं बनने जा रहा था। इस पर राजनीति तभी तेज हो सकती थी जब...

  • बांग्ला अस्मिता के दांव की काट नहीं

    भारतीय जनता पार्टी बांग्ला अस्मिता के दांव की काट नहीं खोज पा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी ने यह कार्ड बहुत होशियारी से खेला था। उस समय चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर उनके चुनाव का प्रबंधन देख रहे थे। उन्होंने खेला होबे का नारा दिया और साथ ही जय श्रीराम के बरक्स जय मां काली का नारा भी लगवाया। इस बार फिर ममता बनर्जी मां माटी मानुष के नारे पर काम कर रही हैं। उन्होंने 21 जुलाई को शहीद दिवस के कार्यक्रम में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का एजेंडा तय कर दिया। उन्होंने फिर से...

  • ममता अभी से तैयारी में लग गईं

    बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की बारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कह दिया है कि बिहार के बाद पश्चिम बंगाल और असम में गहन पुनरीक्षण होगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। उसके बाद देश के अलग अलग हिस्सों में मतदाता सूची की सफाई का काम होगा। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों को इसके लिए तैयार रहने को कहा है। चुनाव आयोग को अब सुप्रीम कोर्ट का भी साथ मिल गया है। बिहार में पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली...

  • गांगुली ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली

    भारतीय क्रिकेट टीम के सर्वकालिक महान कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव आ रहे हैं और इससे पहले की पार्टियां उनको राजनीति में घसीटने या अपनी पार्टी में शामिल करने का अभियान चलाएं उन्होंने कह दिया है कि वे राजनीति में नहीं जाना चाहते हैं। हालांकि पहले भी वे कई बार यह बात कह चुके हैं और सभी पार्टियों के नेताओं की निजी बातचीत में भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनको राजनीति में नहीं जाना है। फिर...

  • दिलीप घोष क्या भाजपा छोड़ने वाले हैं?

    पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के सामने एक बड़ा संकट आता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा को तोड़ने की कोशिश में हैं। हालांकि इसमें कितनी कामयाबी मिलेगी यह नहीं कहा जा सकता है लेकिन फिलहाल एक नाम ऐसा दिख रहा है, जो अपनी पार्टी से दूरी बनाए हुए है। वह नाम है पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद दिलीप घोष का। वे पिछले कुछ दिनों से पार्टी से नाराज चल रहे हैं। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में...

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