ये हाल कैसे हुआ?
क्या चीन से संबंध सुधारने की प्रक्रिया इस पराजयवादी मानसिकता के तहत चल रही है कि चीन का मुकाबला करना संभव नहीं र...
क्या चीन से संबंध सुधारने की प्रक्रिया इस पराजयवादी मानसिकता के तहत चल रही है कि चीन का मुकाबला करना संभव नहीं र...
श्रम सर्वे अगर गिग कर्मियों और घरेलू काम में लगी महिलाओं की केवल गिनती करता है, जबकि उन्हें साम...
हाल में संकेत मिले कि सत्ता पक्ष का नैरेटिव कंट्रोल टूट रहा है। उस नियंत्रण को वापस...
ताजा घटनाएं न केवल संबंधित संस्थाओं की लापरवाही का संकेत हैं, बल्क...
मुंह मोड़ लेने से वो ठोस हकीकतें नहीं बदल जाएंगी, जिस कारण देश में अशांति का म...
जब मूलभूत प्रश्न राजनीतिक दलों के लिए महत्त्वपूर्ण नहीं रहते और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं जन समस्याओं का समय पर सम...
इलॉन मस्क ने कुछ रोज पहले पूछा था कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं? अ...
एनडीएमए के भीड़ प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देशों को धार्मिक आयोजनों के कर्ता-धर्ताओं ने शायद पढ़ने की जरूरत भी नहीं...
अदालत ने स्वीकार किया इंटरनेट की वर्तमान स्थिति बच्चों के लिए कतई सुरक्षित नहीं है। यह मानने के बावजूद जजों ने स...
सरकार और रेज़ीम एक ही चीज नहीं हैं। सरकार लोगों का एक समूह है, जिसके पास सत्ता...
आईडीबीआई की कहानी कहीं अधिक गंभीर समस्या का उदाहरण है। आईसीआईसीआई और आईडीबीआई को दीर्घकालिक औद्योगिक एवं ढांचागत...
भारत अब ब्रिटेन से नीचे जाकर छठे नंबर पर है। एक समय अमेरिका और चीन के बाद भारत के तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ब...
ऐसा लगता है कि नंदन निलेकणी देश की जमीनी हकीकत से बेखबर हैं। इसलिए उनकी बातें सुनकर यह सवाल भी उठा है कि क्या सच...
चीन के साथ व्यापार भारत की प्रादेशिक अखंडता को उसकी चुनौतियों के साये में जारी नहीं रह सकता। यह बात भारत सरकार क...
संवैधानिक व्यवस्था जिन स्तंभों पर टिकी होती है, हाल के वर्षों में उन पर लगातार प्रहार हुए हैं, ...