बड़े पर्यटन स्थल के रूप में उभरने की भारत की महत्त्वाकांक्षा पहले ही चोटिल हो चुकी है। अब ये धारणा बनी कि यहां सुरक्षित स्थितियां नहीं हैं, तो मेडिकल टूरिज्म भी प्रभावित हो सकता है।
दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में हुए अग्निकांड ने राष्ट्रीय राजधानी में आम प्रशासन के ध्वस्त हो चुके सिस्टम की पोल खोली है। इस दर्दनाक घटना में 21 लोगों की जान गई, जिनमें दर्जन भर विदेशी हैं। दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) स्कीम के तहत आवासीय इलाकों में मकानों को होटल की तरह चलाने की छूट मिली हुई है। मगर, इसके लिए नियम और शर्तें तय हैं। बुधवार को हुए हादसे ने बताया कि इन नियम- शर्तों की किस धड़ल्ले से और कितना बेखौफ होकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस बीएंडबी होटल में आग लगी, उसे छह कमरे देने की इजाजत थी, मगर वहां 26 कमरों में आगंतुक रखे जा रहे थे।
फायर संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की जरूरत उसके मालिक नहीं समझी थी! और अब यह साफ है कि दिल्ली सरकार या एमसीडी के अधिकारियों ने निगरानी या औचक निरीक्षण की या तो जरूरत नहीं समझी, या फिर उनकी मिलीभगत से यह गोरखधंधा चल रहा था। अब मीडिया रिपोर्टों से यह भी साफ है कि उस इलाके में ऐसे अपने होटल चल रहे हैं। और उसी इलाके में क्यों, जब वहां ऐसा हो रहा है, तो अनुमान लगाया जा सकता है कि ऐसा राष्ट्रीय राजधानी के अन्य इलाकों में भी चल रहा होगा! अग्निकांड का शिकार हुआ होटल एक बड़े प्राइवेट अस्पताल के पास है। उस अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों के परिजन आस-पास के ऐसे ठिकानों पर ठहरते हैं।
भारत- खासकर दिल्ली कथित मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख स्थल है, जहां मध्य, पश्चिम एवं दक्षिण एशिया, अफ्रीका और कुछ यूरोपीय देशों के मरीज भी इलाज कराने आते हैं। इस हादसे की खबर उन देशों में कैसा माहौल बनाएगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अभद्रता, महिलाओं से दुर्व्यवहार, गंदगी और बढ़ते प्रदूषण के कारण पर्यटन उद्योग के बड़े स्थल के रूप में उभरने की भारत की महत्त्वाकांक्षा पहले ही चोटिल हो चुकी है। अब ये धारणा बनी कि मरीज या उनके परिजनों के लिए यहां सुरक्षित स्थितियां नहीं हैं, तो मेडिकल टूरिज्म भी प्रभावित हो सकता है। मगर अपने यहां मानवीय त्रासदी और उनके दूरगामी परिणामों की आखिर चिंता किसे है!
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