राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

अंदर से खुली चुनौती

ममता बनर्जी ने राजनीतिक व्यवस्था की सर्व-स्वीकार्यता खुली चुनौती दी है। व्यवस्था के सामने इससे संवैधानिक या कानूनी संकट भले ना खड़ा हुआ हो, लेकिन लोकतंत्र की विश्वसनीयता और नैतिकता के प्रश्न जरूर उठे हैं।

ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की औपचारिकता पूरी करने से इनकार कर दिया है। उनकी दलील है कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि लगभग 100 सीटें “लूट” कर उसे जबरन हराया गया। अपनी चुनावी हार को इस तरह चुनौती देने की भारत में यह पहली घटना है। खास यह है कि बड़ी संख्या विपक्षी नेताओं ने ममता बनर्जी के इस दावे का समर्थन किया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा- ‘असम और बंगाल निर्वाचन आयोग के समर्थन से भाजपा द्वारा चुनावों की चोरी के स्पष्ट उदाहरण हैं। हम ममता जी की इस राय से सहमत हैं कि बंगाल में 100 से ज्यादा सीटें चुरा ली गईं।’

गांधी ने इस सिलसिले में मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और 2024 के लोकसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। इसी क्रम में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में “चुनाव की चोरी” का जिक्र किया है। सोशल मीडिया पर हो रही प्रतिक्रियाओं को देखें, तो भारतीय जनमत का एक बड़ा हिस्सा इन नेताओं से सहमत नजर आता है। जाहिर है, ऐसी धारणाएं विपक्षी खेमे में जड़ जमा चुकी हैं। मगर अब बात शक जताने या आरोप लगाने तक नहीं रही। ममता बनर्जी ने राजनीतिक व्यवस्था की सर्व-स्वीकार्यता खुली चुनौती दी है। व्यवस्था के सामने इससे संवैधानिक या कानूनी संकट भले ना खड़ा हुआ हो, लेकिन लोकतंत्र की विश्वसनीयता और नैतिकता के प्रश्न जरूर उठे हैं।

स्वतंत्रता के बाद से कई बार अलगाववादी एवं उग्र-वामपंथी तत्वों ने व्यवस्था की लोकतांत्रिक साख को चुनौती दी, लेकिन मुख्यधारा के राजनीतिक वर्ग में इस मुद्दे पर मत विभाजन देखने को कभी नहीं मिला। जबकि अब हालिया चुनावों को लेकर विपक्ष में उभरी प्रतिक्रिया राजनीतिक अभिजात के अंदर पड़ रही दरार का सूचक है। किसी व्यवस्था के लिए यह खतरनाक स्थिति होती है। व्यवस्था के न्यायप्रिय और सर्व-हितधारक होने को लेकर पॉलिटिकल इलीट के अंदर ही आम सहमति नहीं होगी, तो वो स्थिति बड़ी अशांति का जनक बन सकती हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के ठिकानों पर हमले और तृणमूल का नतीजों को ठुकराना ऐसी बन रही सूरत का संकेत देते हैं।

By NI Desk

Under the visionary leadership of Harishankar Vyas, Shruti Vyas, and Ajit Dwivedi, the Nayaindia desk brings together a dynamic team dedicated to reporting on social and political issues worldwide.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

20 − thirteen =