गिरफ्तार लोगों में सबसे संदिग्ध भूमिका अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक की है। वह पहले लीबिया और सीरिया के सशस्त्र संघर्षों में शामिल रह चुका है। वह म्यांमार स्थित विद्रोहियों को ड्रोन युद्धकला सिखाने में लगा हुआ था।
छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी का मामला गंभीर है। यूक्रेन सरकार ने इन गिरफ्तारियों पर विरोध जता कर इसे रहस्यमय भी बना दिया है। इन लोगों की गिरफ्तारी बागी संगठनों की मदद करने और अवैध हथियार उपलब्ध कराने के आरोप में हुई है। ऐसे में बिना पूरा सच सामने आए यूक्रेन सरकार उनके पक्ष में क्यों खड़ी हो गई? आरोप है कि इन लोगों ने यूरोप से ड्रोन की भारी खेप मंगा कर उसे म्यांमार के सशस्त्र विद्रोही संगठनों को उपलब्ध कराया। ये लोग भारत आकर बिना परमिट हासिल किए मिजोरम चले गए। वहां से सीमा पार कर म्यांमार गए। वहां से लौटने पर भारत की जांच एजेंसी एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार किया।
एनआईए के अनुसार म्यांमार के जिन गुटों की मदद ये आरोपी कर रहे थे, उनके भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के विद्रोही संगठनों से हथियारों के आदान-प्रदान एवं प्रशिक्षण में सहयोग के संबंध हैं। ये जग-जाहिर है कि म्यांमार के गृह युद्ध में बाहरी शक्तियों का हाथ भी है। उस संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत आए हैं। बल्कि आरोप है कि वहां से संबंधित उग्रवादियों ने मणिपुर और मिज़ोरम में अपने ठिकाने बना लिए हैं। नई दिल्ली की अदालत में पेशी के दौरान एनआईए ने कहा कि गिरफ्तार लोग भाड़े के सैनिक की भूमिका निभा रहे थे। उनकी गतिविधियां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी हैं। एजेंसी ने उन लोगों पर गैर-कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तार लोगों में सबसे संदिग्ध भूमिका अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक की बताई गई है। वह पहले लीबिया और सीरिया के सशस्त्र संघर्षों में शामिल रहा है, जहां बाहरी मदद से शासकों को हटाया गया था। एनआईए का आरोप है कि वह अपने युद्ध अनुभव का उपयोग म्यांमार स्थित विद्रोहियों को ड्रोन युद्धकला सिखाने में कर रहा था। तो कुल मिलाकर ये गिरफ्तारियां उत्तर-पूर्व में विदेशी हस्तक्षेप की चिंताजनक स्थितियों की ओर इशारा करती हैं। अपेक्षित है कि इस मामले की पूरी जांच हो और इसे अंजाम तक पहुंचाया जाए। इस बीच यूक्रेन के विरोध को नजरअंदाज कर दिया जाना चाहिए।
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