बिखरती वैश्विकी में भारत एक मोड़ पर
अर्थशास्त्री इस स्थिति को लेकर सावधान हैं। जगदीश भगवती ने पहले ही चेताया था कि बहुत सारे अलग-अलग व्यापार समझौते “स्पेगेटी बाउल” जैसी उलझन पैदा करते हैं—नियम जटिल हो जाते हैं और लाभ सबसे कुशल व्यापारियों को नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से पसंदीदा साझेदारों को मिलता है। दो सौदों की कहानी भारत की 2026 की शुरुआत ज़ोरदार कूटनीतिक हलचल से हुई। 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डर लेयेन ने भारत–यूरोपीय संघ के एक बड़े मुक्त-व्यापार समझौते की घोषणा की। ब्रसेल्स में इसे “सभी सौदों की जननी” कहा गया। इसमें शुल्क कम करने,...