USA

  • धमकी भर से हड़कंप

    ट्रंप भारत को लगातार धमकियां दे रहे हैं, इसके बावजूद कि भारत ने अमेरिका से दोगुना तेल खरीदा है। मुद्दा है कि भारत अमेरिका के सामने इतना लाचार क्यों नजर आता है? जाहिरा तौर पर इसकी वजह भारत की अपनी कमजोरियां हैँ। डॉनल्ड ट्रंप ने संकेतों की भाषा में धमकी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें खुश रखें, वरना भारत और वे और टैरिफ लगा देंगे। इतने भर से भारत के कारोबार जगत में बेचैनी फैल गई। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स ने कहा कि अमेरिका ने मौजूदा 50 फीसदी टैरिफ को बढ़ाया, तो उसका भारतीय निर्यात पर बहुत खराब...

  • 2025: हिंदू को हथकड़ी!

    आप भी सोचें, साल की कौन सी तस्वीर हम हिंदुओं के लिए सर्वाधिक शर्मनाक थी? मेरी स्मृति में हथकड़ी पहने हिंदुओं का अमेरिकी सैनिक विमान से उतरते हुए फोटो। फिर उस तस्वीर, वीडियो को आला अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दुनिया में प्रचारित करना। मगर मोदी सरकार के मुंह से आपत्ति, विरोध का एक शब्द भी नहीं! ऐसे में साल अंत में बांग्लादेश में हिंदुओं को मारने की ताजा घटनाओं पर क्या रोएं? 1947 से 2025 के हिंदू अनुभवों में दुनिया में कभी हिंदुओं को हथकड़ी पहना कर, जलील कर भारत लौटाने की घटना नहीं हुई। इसलिए आश्चर्य नहीं जो पड़ोसी पिद्दी...

  • अमेरिका को पीछे छोड़ आगे बढ़ी दुनिया!

    जी-20 के जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन से साफ जाहिर हुआल है कि अमेरिका की गैर-हाजिरी से वहां ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। जी-20 तो वैसे भी दुनिया की नई कथा से मामूली रूप से ही जुड़ा हुआ है। यह कथा लिखने के प्रमुख मंच ब्रिक्स+, यूरेशियन इकॉनमिक यूनियन, शंघाई सहयोग संगठन आदि जैसे संगठन हैं, और वहां तो अमेरिका उपस्थिति ही नहीं है।  ‘संकट के समय जन्मा, लेकिन वर्षों तक अपने सदस्यों के तनाव से ग्रस्त रहे जी-20 समूह में पिछले सप्ताहांत बहु-पक्षीयता (multilateralism) की एक बड़ी जीत हुई, जब यह अपने सबसे शक्तिशाली सदस्य अमेरिका के बहिष्कार एवं आपत्तियों से उबरने...

  • ट्रंप का अमेरिका वैश्विक बेगाना!

    कौन सोच सकता था कि “नियम-आधारित व्यवस्था” का अपने को संरक्षक बताने वाला अमेरिका एक दिन दुनिया में अछूत बनने की और होगा?  जिसने उदार वैश्विक व्यवस्था बनवाई, नेटो को गूंथा, संयुक्त राष्ट्र का चार्टर लिखा, और दशकों तक दूसरों को वैश्विक ज़िम्मेदारी पर उपदेश दिया, वही उस वास्तुशिल्प से अब मुंह चुरा रहा है, पीछे हट रहा है! आइजनहावर से लेकर रीगन जैसे सख्त रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों के दौर में भी अमेरिका की वैश्विक भूमिका स्थिर रहीष मतबल दुनिया का चौकीदार, अपरिहार्य शक्ति, गठबंधनों का संरक्षक, लोकतंत्र-बाज़ार-आधुनिकता का अगुआ।  अमेरिकी शक्ति अंतरराष्ट्रीय जीवन का लंगर थी—अहंकार, उपदेशों और हस्तक्षेपों तथा...

  • भारत-अमेरिका में हुई पहली डील

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच पहला व्यापारिक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन टन एलपीजी खरीदेगा। यह भारत की सालाना गैस जरूरत का 10 फीसदी है। यह समझौता अगले साल यानी 2026 के लिए किया गया है। गौरतलब है कि भारत पहले ही अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा चुका है। इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नए सिरे से बहाल करने में मदद मिलेगी। इसे मुक्त व्यापार संधि की दिशा में एक कदम माना...

  • होगा व्यापार युद्ध-विराम?

    ट्रंप- शी वार्ता में मलेशिया में बनी सहमतियों पर दस्तखत हो जाते हैं। ऐसा हुआ, तो अमेरिका और चीन के अलावा बाकी दुनिया को भी राहत मिलेगी। मगर जो हालात हैं, उनके बीच यह करार भी एक अल्पकालिक युद्धविराम ही होगा। दुनिया नजरें गुरुवार को दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर पर होंगी, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की शिखर वार्ता प्रस्तावित है। राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल में ट्रंप की शी के साथ यह पहली मुलाकात होगी, जिसके लिए वे खासे उतावले नजर आए हैँ। यह उतावलापन कुछ तो उनकी “ट्रॉन्गमैन पॉलिटिक्स” के कारण है,...

  • भारत पर टैरिफ बढ़ाने को जी-7 पर अमेरिकी दबाव

    नई दिल्ली। भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद अमेरिका अब जी-7 देशों पर दबाव डाल रहा है कि वे भारत के ऊपर अतिरिक्त टैरिफ लगाएं। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों भारत को और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोस्त बताते हुए व्यापार वार्ता शुरू होने की बात कही थी। लेकिन अब खबर है कि जी-7 देशों की बैठक में अमेरिका ने उनके ऊपर दबाव बनाया कि वे भारत के ऊपर अतिरिक्त टैरिफ लगाएं। असल में शुक्रवार को जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की एक बैठक हुई है, जिसमें रूस पर और प्रतिबंध...

  • असमानता और नियति ‘सुपरपावर इन वेटिंग!

    लंदन के द इकॉनोमिस्ट ने ठिक लिखा कि “यदि अमेरिका भारत को अलग-थलग करता है, तो यह उसकी ऐतिहासिक भूल होगी। जबकि भारत के लिए अपनी सुपरपावर बनने की दावेदारी को परखने का यह मौका है।” पहली नज़र में वाक्य सुकून देता है — जैसे अमेरिका ग़लती करेगा अगर डगमगाया, और भारत नियति के द्वार पर खड़ा है। पर ध्यान से सुनें तो यह तारीफ़ नहीं, टालमटोल है। सुपरपावर-इन-वेटिंग यानी अभी नहीं। याकि महज नारे जिनमें जान नहीं, प्रदर्शन जिसमें ताक़त नहीं। एंकर की तरह तीन शब्द हमें बाँध देते हैं। एक ऐसा राष्ट्र जो अपने ही भविष्य की कतार...

  • अमेरिका की चाहत

    दो बातें साफ हैं। ट्रंप प्रशासन को ‘आंख में आंख डाल कर’ बात करना और संप्रभुता का उल्लेख करना नागवार गुजरा है। कोई देश उससे बातचीत में अपने आर्थिक हितों की बात करे, यह उनके प्रशासन को मंजूर नहीं है। डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन क्यों भारत से खफा हुआ, इसके राज़ खुद उनके अधिकारी खोल रहे हैं। वाणिज्य मंत्री स्कॉट बेसेंट कह चुके हैं कि कारण सिर्फ रूस का कच्चा तेल खरीदना नहीं है, बल्कि व्यापार वार्ता में भी भारत ‘अड़ियल’ रुख अपना रहा था। अब राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रमुख व्यापार सलाहकार पीटर नोवेरो कहा है कि ‘वे (भारतीय) इतने...

  • मुंबई में अनिश्चितता और न्यूयार्क में भरोसा!

    कुछ दिनों से मैं मुंबई में हूँ। यह महानगर  उभरते भारत की झिलमिलाहट बतलाता हुआ है। काँच की इमारतें मानसून के आसमान को छूती हैं। नया कोस्टल रोड अरब सागर पर किसी रिबन की तरह खुलता चला जाता है। यह वही शहर है जो न्यूयॉर्क बनने का सपना देखता है। तभी लगातार निर्माणाधीन स्काइलाइन, वॉल स्ट्रीट के ब्रोकरों जैसी दौड़-भाग, ब्रॉडवे जितने चमकीले फिल्म सितारे, और वे कैफ़े, जहाँ स्टार्टअप की बातें गूँजती रहती हैं। मुंबई उस वैश्विक चमक को छूना चाहती है और वह न कभी सोता है और न थमता है।  हमेशा भागता है, हमेशा ऊपर उठने को...

  • अमेरिका को समझौते की उम्मीद

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के संबंधों में अंत में सब कुछ ठीक हो जाने की उम्मीद है। अमेरिका ने खुद यह उम्मीद जताई है। उसके वित्त मंत्री ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बेहतर समझौता हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच अमेरिकी वित्त मंत्री का बयान अहम है। भारत ने भी सूत्रों के हवाले से कहा है कि दोनों देशों के बीच सब कुछ ठीक हो जाएगा। कहा गया है कि यह लंबे संबंध के बीच एक छोटी अवधि है। इससे...

  • एक नॉर्वे है और एक रामजी का भारत!

    पहली खबर नॉर्वे की है। नॉर्वे सरकार के पेंशन का एक वैश्विक सॉवरेन वेल्थ फ़ंड (GPFG) है। लगभग दो ट्रिलियन डॉलर का कोष। इसे वहां की सरकार ने 1990 में तेल की कमाई को जमा करते हुए बनाया। यह विश्व में निवेश कर देशवासियों की पेंशन संभालता है। इसे किस देश, किस कंपनी में निवेश करना है, इसके सुझाव का काम एक नैतिक परिषद (Ethics Council) करती है। और पता है 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो चार दिन के भीतर नॉर्वे की संसद और वित्त मंत्रालय ने फ़ंड को रूस और उससे जुड़ी कंपनियों से...

  • अब भारत से डाक नहीं जाएगी अमेरिका

    नई दिल्ली। अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ का असर अब दिखने लगा है। भारतीय डाक विभाग 25 अगस्त से अमेरिका के लिए ज्यादातर डाक की बुकिंग स्थगित करने जा रहा है। हालांकि अभी ये फैसला अस्थायी रूप से लागू होगा। शनिवार, 23 अगस्त को डाक विभाग ने एक प्रेस बयान जारी करके इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि 29 अगस्त से अमेरिका जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय डाक सामानों पर इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट यानी आईईईपीए टैरिफ ढांचे के अनुसार कस्टम ड्यूटी देनी होगी।  चाहे उनकी कीमत कितनी भी हो। हालांकि, एक सौ डॉलर यानी करीब...

  • भारत पर 50 फीसदी टैरिफ

    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 घंटे में भारत पर बड़ा टैरिफ लगाने की अपनी धमकी पर अमल कर दिया है। उन्होंने भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है, जिसके बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ कर 50 फीसदी हो गया है। यह राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से सीरिया, कंबोडिया जैसे देशों पर लगाए गए टैरिफ के लगभग बराबर हो गया है। ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने के आदेश पर दस्तखत कर दिया है लेकिन यह आदेश 20 दिन के बाद 27 अगस्त से लागू होगा। गौरतलब है कि इससे पहले...

  • अमेरिका से व्यापार संधि एक अगस्त से पहले

    भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर व्यापार संधि की वार्ता शुरू होने वाली है। भारत की वार्ता टीम जल्दी ही अमेरिका जाएगी और बताया जा रहा है कि एक अगस्त की डेडलाइन खत्म होने से पहले दोनों देशों के बीच समझौता हो जाएगा। ध्यान रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली डेडलाइन नौ जुलाई को खत्म हो गई है। उसके बाद उन्होंने कई देशों को चिट्ठी लिख कर उनके ऊपर टैरिफ बढ़ाने की सूचना दी। दो दिन में उन्होंने 20 से ज्यादा देशों को चिट्ठी लिख कर टैरिफ बढ़ाया है। हालांकि उन्होंने उनको भी एक अगस्त की मोहलत दी...

  • मस्क ने बनाई राजनीतिक पार्टी

    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क ने अपने वादे के मुताबिक नई पार्टी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा था कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बिग ब्यूटीफुल बिल पास होता है तो वे पार्टी बनाएंगे ताकि अमेरिका को दो पार्टी सिस्टम से मुक्त किया जा सके। तभी बिग ब्यूटीफुल बिल पास होने के बाद मस्क ने शनिवार को अमेरिका में एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया। उन्होंने इसका नाम 'अमेरिका पार्टी' रखा है। मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नई पार्टी की जानकारी देते हुए लिखा, ‘आज अमेरिका पार्टी का गठन...

  • अमेरिका ने कैसी दुश्मनी पाल ली!

    ऐसा लग रहा है कि अमेरिका ने भारत के साथ दुश्मनी पाल ली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन एक के बाद एक ऐसे फैसले कर रहा है, जिससे भारत के हितों को नुकसान हो रहा है। चाहे भारतीय को अमेरिका से निकालना हो, वीजा रद्द करना हो, छात्रों को रोकना हो, टैरिफ लगाना हो या पाकिस्तान को भारत की बराबरी में लाना हो। उनके सारे काम भारत विरोधी दिख रहे हैं और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से लेकर दूसरे तमाम राजनयिक और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की यात्रा करते रहे, ट्रंप और उनके प्रशासन के लोगों...

  • यथार्थ को स्वीकार करें

    अमेरिका का पाकिस्तान को खुला समर्थन उस समय मिला है, जब चीन और रूस अपने समीकरणों में उसे जगह देने के लिए प्रयासरत हैं। यानी यह ऐसा मौका है, जब दुनिया की तीनों बड़ी ताकतों की छत्रछाया पाकिस्तान को मिल रही है। यह वक्तव्य डॉनल्ड ट्रंप का नहीं है, जिनके रुख की अस्थिरता बहुचर्चित है। ये बातें अमेरिका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल माइकल कुरिला ने कही हैं। जनरल कुरिला यूएस सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) के कमांडर हैं। उन्होंने बयान अमेरिकी संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सशस्त्र सेना समिति के सामने दिया। यानी जो कहा गया, वह आधिकारिक...

  • पलक झपकी, तो क्यों?

    दोनों देशों में एक दूसरे की वस्तुओं पर दस फीसदी टैरिफ लगेगा। चूंकि ट्रंप प्रशासन ने चीन पर मादक पदार्थ फेंटानील भेजने का आरोप लगाते हुए अतिरिक्त शुल्क लगा रखा है, तो फिलहाल अमेरिका में चीनी आयात पर व्यावहारिक टैरिफ 30 प्रतिशत रहेगा। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जिनेवा में हुई उच्चस्तरीय वार्ता अपेक्षा से अधिक सफल रही। संभावना जताई गई थी कि बातचीत के पहले चरण में कोशिश आपसी भरोसा बनाने तक सीमित रहेगी। लेकिन दो दिन की वार्ता के दौरान दोनों देश एक- दूसरे के आयात पर शुल्क में भारी...

  • कितनी पिघलेगी बर्फ?

    सीधी बातचीत के लिए दोनों पक्षों का राजी होना महत्त्वपूर्ण है। डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से दुनिया में व्यापार अस्थिरता का माहौल है। इसका सबसे बड़ा पहलू इन दोनों आर्थिक महाशक्तियों के बीच छिड़ा व्यापार युद्ध है। लंबे ना-नुकुर के बाद आखिरकार अमेरिका और चीन सीधी व्यापार वार्ता पर राजी हुए हैं। शनिवार को जिनेवा में अमेरिका के वाणिज्य मंत्री स्कॉट बेसेंट और मुख्य व्यापार वार्ताकार जेमिसन ग्रीयर की चीन के उप प्रधानमंत्री हे लीफेंग के साथ बातचीत होगी। वार्ता की पहल किसने की, इसको लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। सार्वजनिक बयानों में खासकर चीन...

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