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खेल का सिकुड़ा बाजार

फुटबॉल वर्ल्ड कप शुरू होने से सिर्फ दस दिन पहले फीफा को सस्ते में प्रसारण अधिकार बेचने पड़े हैं। यह घटनाक्रम बताता है कि भारतीय बाजार को लेकर फुलाया गया गुब्बारा अब फूट चुका है।

ज़ी ग्रुप का फिर से खेल प्रसारण के क्षेत्र में उतरना अच्छी खबर है। रिलायंस ग्रुप के डिज्नी हॉटस्टार को खरीद लेने और सोनी लिव के भारतीय बाजार में हाथ खींच लेने के बाद जियो-हॉटस्टार की लगभग मोनोपॉली बन गई थी। अब ज़ी ग्रुप ने 11 जून से शुरू हो रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप का टीवी एवं डिजिटल प्रसारण अधिकार खरीद कर फिर से प्रतिस्पर्धा की संभावना जगाई है। बहरहाल, इस क्रम में भारतीय खेल प्रसारण बाजार के सिकुड़ने के संकेत भी मिले हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2022 के फीफा वर्ल्ड कप के प्रसारण का अधिकार रिलायंस ग्रुप के वायकॉम-18 एवं जियो सिनेमा ने तकरीबन छह करोड़ डॉलर में खरीदे थे।

अब चार साल ज़ी ने 2026 और 2030 के वर्ल्ड कप समेत फीफा के नौ टूर्नामेंट्स के प्रसारण का अधिकार सिर्फ साढ़े तीन करोड़ डॉलर में खरीद लिए हैँ। बताया जाता है कि 2022 में वर्ल्ड कप प्रसारण के दौरान सिर्फ करीब 300 करोड़ रुपये के विज्ञापन ही जुटाए जा सके। इस कारण इस बार इस टूर्नामेंट का बाजार भाव गिर गया। फीफा ने आरंभिक कीमत सिर्फ 2026 के टूर्नामेंट के लिए 10 करोड़ डॉलर रखी थी। जियो हॉटस्टार ढाई करोड़ डॉलर से ज्यादा देने को तैयार नहीं हुआ। सोनी भी शुरुआती बातचीत के बाद मैदान से हट गया। तो टूर्नामेंट शुरू होने से सिर्फ दस दिन पहले फीफा को सस्ते में प्रसारण अधिकार बेचने पड़े।

यह घटनाक्रम बताता है कि भारतीय बाजार को लेकर फुलाया गया गुब्बारा अब फूट चुका है। कुछ समय पहले ये गौरतलब खबर आई थी कि जियो हॉटस्टार आईसीसी के साथ अपने क्रिकेट प्रसारण समझौतों पर फिर से सौदेबाजी करना चाहता है। इसका कारण है कि मीडिया अधिकार पाने की लागत बहुत अधिक (138 करोड़ रुपये प्रति मैच) पड़ी है, जबकि विज्ञापन राजस्व उतना नहीं है। आम समझ है कि अगले साल जब फिर से मीडिया अधिकार बिकेंगे, तो आईसीसी को पहले से कम भाव पर ये बिक्री करनी होगी। तो कुल मिला कर सिर्फ आईपीएल हॉट प्रोपर्टी बना हुआ है, हालांकि इस वर्ष उसकी टीवी दर्शक संख्या पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

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By NI Editorial

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