केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने इस साल 12वीं की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम प्रक्रिया से कॉपी जांची है। इसके लिए कोई तैयारी नहीं की गई थी, न प्रशिक्षण हुआ था और न पायलट प्रोजेक्ट चला था और न बहुत अनुभवी व तकनीक से सक्षम कंपनी को ठेका दिया गया था। तभी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच को लेकर लाखों शिकायतें आईं। 18 लाख के करीब छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से चार लाख से ज्यादा बच्चों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया और उनमें से एक लाख 60 हजार बच्चे अपनी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन करा रहे हैं। इसमें जो गड़बड़ियां आईं वो सबको पता है।
छात्रों ने बताया कि उनकी कॉपी बदल गई या उनकी कॉपी के पन्ने छूट गए या धुंधला स्कैन हुआ या सवालों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया या अंक गलत जोड़े गए आदि। अब एक नई गड़बड़ी सामने आई है। राजस्थान में शिक्षकों ने कहा है कि उनके ऊपर गुजरात और बंगाल क्षेत्र की कॉपी थोप दी गई, जिससे उनके सामने भाषा की समस्या आई। याद करें कैसे नीट यूजी की परीक्षा का मामला सामने आया था कि केमिस्ट्री के शिक्षक को मराठी अनुवाद का जिम्मा दिया गया था और वहां पेपर लीक हुआ था। यहां राजस्थान के लोगों को गुजराती और बंगाली भाषा की कॉपी दे दी गई थी जांचने के लिए। अभी पता नहीं ऐसी कितनी और गड़बड़ियां हैं, जो सामने नहीं आ पाई हैं।


