पश्चिम एशिया की ताजा घटनाओं से फिर पुष्टि हुई है कि कोई देश महज युद्ध शुरू करने के लिए स्वतंत्र होता है। उसके बाद जंग का अपना गतिशास्त्र बन जाता है, जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं होता।
डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पश्चिम एशिया युद्ध का नियंत्रण उनके हाथ में है और उनके निर्देश पर बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के ताजा हमलों का जवाब नहीं देंगे। मगर कुछ घंटों के बाद ही इजराइल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए। इससे साफ हो गया है कि जंग की दिशा अनियंत्रित हो गई है। रविवार रात ईरान ने इस युद्ध का दायरा फैलाते हुए इसे बहुपक्षीय रूप दे दिया। उसने एलान किया कि अब जवाबी कार्रवाई के लिए खुद पर हमला होने का इंतजार करने के बजाय वह अपनी सहयोगी ताकतों पर इजराइली हमलों का भी सीधा जवाब देगा।
इसके कुछ घंटों के बाद उसने इजराइल पर मिसाइलें दागीं। इसी बिंदु पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने दखल दिया और इजराइली प्रधानमंत्री से बात की। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अमेरिका समझौते के करीब है और नेतन्याहू के पास उस समझौते को स्वीकार करने के अलावा “कोई विकल्प नहीं” है। मगर कुछ देर बाद ही नेतन्याहू ने अपने एक्शन से संदेश दिया कि वे ट्रंप के नियंत्रण में नहीं हैं। नतीजतन, आठ अप्रैल से जारी असहज युद्धविराम अब पूरी तरह टूट गया है। वैसे, जिस समझ के साथ युद्धविराम पर सहमति बनी थी, उस रूप में इस पर कभी अमल नहीं हुआ। इजराइल ने रुक-रुक कर गजा और लेबनान पर हमले जारी रखे।
शनिवार को उसने लेबनान पर प्रत्यक्ष हमला करने की घोषणा की, जिसके जवाब में ईरान ने जंग का दायरा फैलाने का निर्णय लिया। इससे ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिनके सामने अमेरिका के घटते रणनीतिक तेल भंडार, बढ़ती महंगाई, बॉन्ड ब्याज दरों में वृद्धि और चार महीने बाद मध्य-कालिक चुनावों की चुनौती खड़ी है। ईरान होरमुज जलमार्ग पर नियंत्रण बनाए हुए है। उसने नई परिस्थितियों में लाल सागर के बाब-ए-मांदेब जलमार्ग को भी बंद करने की धमकी दे रखी है। उसका विश्व अर्थव्यवस्था पर और भी घातक असर होगा। बहरहाल, इस घटनाक्रम से फिर पुष्टि हुई है कि कोई देश महज युद्ध शुरू करने के लिए स्वतंत्र होता है। उसके बाद जंग का अपना गतिशास्त्र बन जाता है, जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं होता।


