इस बार मॉनसून कमजोर रहने की आशंका है। इस चुनौती के मद्देझनर सरकार ने क्या एहतियातन कदम उठाए हैं, इस बारे में उसे देश को भरोसे में लेना चाहिए, ताकि लोग घबराहट से बच सकें।
मौसम को लेकर आशंकाएं बढ़ रही हैं। आधा जून गुजर चुका है और अटके मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना नहीं दिख रही है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसूनी बारिश में अब तक 35 प्रतिशत की कमी दर्ज हो चुकी है। वैसे इस समय तक ऐसा होना असामान्य नहीं है, मगर चिंता बढ़ाने वाला पहलू एन नीन्यो परिघटना का सक्रिय हो जाना है। अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय एवं वातावरणीय प्रशासन (एनओएए) ने 11 जून को एलान कर दिया कि भू-मध्यरेखा के पास प्रशांत महासागर में एल नीन्यो का उभार हो चुका है।
एल नीन्यो प्रशांत महासागर में होने वाले उस बदलाव को कहते हैं, जिससे समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसका दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है और भारत में अक्सर सूखा या कम बारिश होती है। 1951 के बाद से 17 बार एन नीन्यो का उभार हुआ है, उनमें से 12 बार भारत में सामान्य से कम बारिश हुई है। एनओएए ने 1951 के बाद 17 में छह एन नीन्यो को ‘अति शक्तिशाली’ श्रेणी में रखा है। उसने कहा है कि इस बार का एन नीन्यो के भी ‘अति शक्तिशाली’ होने की संभावना है। भारत में धान, दलहन, और सब्जियों की खेती मानसूनी बारिश पर काफी हद तक निर्भर रहती है। कम बारिश होने पर डेयरी क्षेत्र भी प्रभावित होता है। इसके अलावा भू-जल के स्वस्थ स्तर के लिए भी पर्याप्त बारिश अनिवार्य है।
कम बारिश होने का पनबिजली परियोजनाओं पर भी खराब असर होता है। इसलिए बन रही स्थिति को लेकर एहतियाती कदम उठाने की अवश्यकता है। भारत के मौसम विभाग ने सामान्य की तुलना में 90 फीसदी तक ही बारिश होने का अनुमान लगाया है। लेकिन संभव है कि यह उससे भी कम हो। और ये चुनौती उस समय आई है, जब ईरान युद्ध के कारण उर्वरकों के अभाव और महंगाई की समस्या पहले से मंडरा रही है। इसलिए ये सवाल अहम है कि इन चनौतियों का सामना करने के लिए सरकार ने क्या एहतियातन कदम उठाए हैं? इस बारे में उसे देश को भरोसे में लेना चाहिए, ताकि लोग घबराहट से बच सकें।
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