आज के व्यस्त और डिजिटल युग में जहां हर कोई फोन, लैपटॉप और टीवी से लगातार जुड़ा रहता है, वहीं मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, लगातार स्क्रीन टाइम आंखों की थकान, सिरदर्द, तनाव और नींद की कमी जैसी समस्याओं को बढ़ावा देता है। गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता से न केवल मन और शरीर दोनों बीमार पड़ते हैं बल्कि रचनात्मकता भी खत्म हो जाती है। ऐसे में खुद के लिए समय निकालकर डिजिटल ब्रेक लेना न सिर्फ जरूरी, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है।
डिजिटल डिटॉक्स का मतलब है कुछ समय के लिए मोबाइल, कंप्यूटर, सोशल मीडिया और टीवी से पूरी तरह दूरी बनाना। इससे दिमाग को आराम मिलता है, तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है। कई लोग अब इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं और इसके सकारात्मक नतीजे देख रहे हैं।
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एक्सपर्ट बताते हैं कि डिजिटल डिटॉक्स कैसे करें, इसके लिए कुछ आसान और कारगर तरीके बताए गए हैं- रोजाना कम से कम 1 घंटा बिना किसी स्क्रीन के बिताएं। इस दौरान फोन को साइलेंट मोड पर या दूर रखें। घर में एक नो-डिजिटल जोन बनाएं, जैसे बेडरूम या डाइनिंग एरिया, जहां कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस न ले जाया जाए। रोज कुछ समय प्रकृति के साथ बिताएं।
पार्क में टहलें, पेड़-पौधों के बीच समय गुजारें या घर की बालकनी में बैठकर हवा लें। पुस्तक पढ़ने की पुरानी आदत को फिर से शुरू करें। कागज वाली किताबें पढ़ना दिमाग को सबसे ज्यादा सुकून देता है। खाने के समय मोबाइल और लैपटॉप को पूरी तरह बंद रखें। परिवार के साथ बातचीत करें और भोजन का असली मजा लें।
डिजिटल डिटॉक्स न केवल तनाव कम करता है, बल्कि रिश्तों को मजबूत बनाने, रचनात्मकता बढ़ाने और खुद से बेहतर जुड़ने का भी मौका देता है। ऐसे में ये छोटे-छोटे बदलाव तन-मन को स्वस्थ रखने में बहुत मदद करते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआत धीरे-धीरे करें। पहले सिर्फ शाम के 30-40 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाते जाएं।
Pic Credit : ANI
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