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चीन के आगे लाचार?

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 अब भारत के पास नहीं हैं। इन स्थलों तक तीन साल पहले तक भारतीय सेना गश्त लगाती थी। लेकिन अब उसका वहां जाना संभव नहीं है।

 

वार्षिक पुलिस सम्मेलन में पेश की गई एक रिपोर्ट की जो खबर मीडिया में आई है, उससे यह साप हो गया है कि चीन ने अप्रैल 2020 के बाद से भारत के एक बड़े इलाके पर कब्जा जमाया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 अब भारत के पास नहीं हैं। इन स्थलों तक तीन साल पहले तक भारतीय सेना गश्त लगाती थी। लेकिन अब उसका वहां जाना संभव नहीं है। इनमें से कई स्थल ऐसे हैं, जो 2020 से जारी टकराव के बीच बने बफर जोन का हिस्सा बन गए हैँ। बफर जोन उन इलाकों को कहा गया है, जहां अब भारतीय या चीनी सेना गश्त लगाने नहीं जाएगी। लेकिन शिकायत यह है कि लगभग सभी बफर जोर उन हिस्सों में बने हैं, जिन पर पहले भारत का नियंत्रण था। बहरहाल, अब तक ऐसी बातें मीडिया रिपोर्टों में कही जाती थीं। एकाध बार संबंधित क्षेत्रों के निर्वाचित स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने भी इस बारे में बयान दिए। लेकिन अब इस बात की पुष्टि खुद पुलिस की एक रिपोर्ट में की गई है।

इसके बावजूद केंद्र सरकार की चुप्पी जारी है। यह रहस्यमय है कि राष्ट्रवाद को हमेशा सबसे ऊपर रखने का दावा करने वाली वर्तमान सरकार चीन का मामला आने पर खामोश क्यों होती जाती है। इस खामोशी की वजह से गुजरे पौने तीन साल में कयासों का दौर रहा है। जबकि बेहतर होता कि सरकार पूरे देश को भरोसे में लेती। वैसे भी भारत में परंपरा यही है कि रक्षा या वैदेशिक मामलों में सारा देश सरकार के साथ खड़ा होता है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के समय भी विपक्ष सहित पूरे देश ने सरकार को अपना पूरा समर्थन दिया था। मगर तब सवाल उठने शुरू हुए, जब सरकार ने चीनी घुसपैठ की खबर को ही नकार दिया। लेकिन क्या अब पुलिस की रिपोर्ट पर भी सरकार का यही रुख रहेगा? ऐसा होना गंभीर चिंता का विषय होगा। सरकार को यह समझना चाहिए कि यह देश को भरोसे में लेने का वक्त है, ताकि राष्ट्रीय आम सहमति से चीन की चुनौती का मुकाबला करने की कारगर रणनीति तैयार हो सके।

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