नई दिल्ली। दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करके सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। असल में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और उन्हें दूसरी जगह ले जाकर रखने के मामले में सात नवंबर को बेहद सख्त फैसला सुनाया था। इसमें बदलाव के लिए कई याचिकाएं दायर की गई थीं।
गुरुवार को सुनवाई पूरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार हर दिन सिर्फ एक सौ आवारा कुत्तों की नसबंदी कर रही है जो नाकाफी है। यह भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु ने सर्वोच्च अदालत के निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं किया है।
राजस्थान की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि राज्य में नसबंदी केंद्र और शिक्षा संस्थानों के आसपास बाड़ लगाई गई है। लेकिन अदालत ने कहा कि राज्य के पास केवल 45 वाहन हैं जो आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जस्टिस मेहता ने कहा कि जब तक पर्याप्त वाहन और स्टाफ नहीं होंगे, तब तक कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी करने, टीकाकरण और छोड़ने की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी? कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर समस्या को आज नहीं सुलझाया गया तो हर साल आवारा कुत्तों की संख्या 10 से 15 फीसदी बढ़ती जाएगी।


