मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड से आगे जाने की कोशिश करने पर कांग्रेस की असम इकाई के प्रमुख गौरव गोगोई और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
गोगोई के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस ने अपने मुख्यालय राजीव भवन से एक मार्च निकाला और उसकी योजना सीईसी का पुतला फूकने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ने की थी।
पुलिस ने राजीव भवन के पास बैरिकेड लगाए थे, जिन्हें गोगोई समेत प्रदर्शनकारी नेताओं ने पार करने की कोशिश की। उसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
कांग्रेस द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में गोगोई ने कहा कि पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए एक ‘लोकतांत्रिक कदम’ उठाया था और ‘भारतीय लोकतंत्र पर हमले के खिलाफ अपनी चिंता प्रकट करने’ के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय जाने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने ‘हमें रोक लिया और हिरासत में ले लिया।’
उन्होंने कहा यदि वे (भाजपा) सोचते हैं कि हमें हिरासत में लेकर हमारा मुंह बंद करा सकते हैं तो उन्हें गलतफहमी हैं। ऐसा लगता है कि भाजपा डर गयी है।
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गोगोई ने कहा,‘‘कांग्रेस भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष करती रहेगी। हम भाजपा को हटायेंगे और देश को बचायेंगे
हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेताओं को बस से चौथी असम पुलिस बटालियन ले जाया गया। इस दौरान उन्हें भाजपा और सीईसी के खिलाफ नारे लगाते हुए सुना गया। वे ‘भाजपा वापस जाओ’ और ‘ज्ञानेश कुमार को गिरफ़्तार करो’ जैसे नारे लगा रहे थे।
कांग्रेस प्रवक्ता बेदव्रत बोरा ने आरोप लगाया कि नेताओं को ‘बलपूर्वक गिरफ्तार’ कर लिया गया। उन्होंने दावा किया गया कि ‘यह लोकतंत्र के लिए एक और खतरा है।’
उन्होंने कहा कुमार का पुतला जलाने के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जो बर्बरता दिखाई, वह न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि हर मोर्चे पर मौजूदा सरकार के बुरी तरह नाकाम रहने का पक्का सबूत भी है
गोगोई के अलावा, हिरासत में लिए गए लोगों में कांगेस सचिव मनोज चौहान, सेवा दल के अध्यक्ष दीप बयान और प्रदेश कांग्रेस महासचिव उदित भानु दास एवं कई अन्य लोग शामिल हैं।
बुधवार को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्तों– सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान एसआईआर से जुड़े फैसलों – जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाना और चुनावी मतदाता सूची का डेटा शामिल है – पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
हालांकि, निर्वाचन आयोग का कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए थे।
कांग्रेस ने कहा कि इन खुलासों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पार्टी की वे चिंताएं पूरी तरह सही साबित होती हैं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि सत्ताधारी भाजपा को ‘अनुचित फायदा’ पहुंचाने के लिए चुनावी मशीनरी पर ‘कब्ज़ा किया जा रहा है और उसमें हेर-फेर की जा रही है।
Pic Credit : UNI
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