नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पद छोड़ने जा रहे हैं। वे राज्यसभा के सांसद बन गए हैं और मंगलवार, 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। लेकिन उससे पहले उनकी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। बिहार सरकार ने आदेश जारी किया है कि राज्य में अब सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। आदेश में कहा गया है कि यदि कोई सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करता हुआ मिला तो उसपर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
सरकार की ओर इसका प्रस्ताव पहले से तैयार किया गया था। शनिवार, 11 अप्रैल को बिहार सरकार के स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने इससे जुड़ा आदेश जारी किया। बिहार सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य में कोई भी सरकारी डॉक्टर प्राइवेट क्लिनिक नहीं चला सकेंगे। साथ ही किसी प्राइवेट अस्पताल में भी काम नहीं कर सकेंगे। शनिवार को इसका संकल्प जारी कर दिया गया। साथ ही कहा गया कि सरकार जल्दी ही इस दिशा में विस्तृत दिशा निर्देश जारी करेगी।
सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए जारी सरकारी चिट्ठी में बताया गया कि यह फैसला राज्य सरकार के सात निश्चय पार्ट तीन में घोषित कार्यक्रम के तहत लिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सात निश्चय पार्ट तीन में बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का वादा किया है, जिसमें एक संकल्प सरकारी ड़ॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का है।
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