नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुना दिया है। सर्वोच्च अदालत ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राजद सहित सभी विपक्षी पार्टियों की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को वैध और संवैधानिक करार दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने बुधवार को कहा कि एसआईआर मनमाना नहीं है और चुनाव आयोग को यह प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। इस तरह एसआईआर की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाला मामला समाप्त हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन यह फैसला सिर्फ चुनावी मकसद तक सीमित रहेगा। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से गैर नागरिक घोषित करने का अधिकार आयोग के पास नहीं होगा। इसके साथ ही अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके नाम चार हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजा जाए।
गौरतलब है कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुई एसआईआर की प्रक्रिया अब तक 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है। इस दौरान 7.41 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ नाम उत्तर प्रदेश से कटे। बिहार के बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी एसआईआर कराया गया, जबकि असम में विशेष समीक्षा हुई। बिहार में एसआईआर के खिलाफ दायर याचिकाओं से ही मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उसके बाद सबसे ज्यादा याचिकाएं पश्चिम बंगाल से दायर की गईं। बंगाल में एसआईआर से जुड़े कुछ का मामले अब भी अदालत में हैं।
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