बीजिंग। कोरोना वायरस की महामारी फैलने और गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों की हिंसक झड़प के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पहुंचे हैं। चीन के तियानजिन शहर में हो रहे शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी दो दिन के दौरे पर चीन पहुंचे हैं। इस दौरान एससीओ सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ दोपक्षीय वार्ता भी होगी।
प्रधानमंत्री मोदी दो दिन के जापान दौरे के बाद शनिवार को एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन पहुंचे। चीन पहुंचने पर हवाईअड्डे पर उनका भव्य स्वागत हुआ। हवाईअड्डे पर लाल कालीन बिछा कर चीन ने उनका स्वागत किया। चीन में 31 अगस्त और एक सितंबर को दो दिन का एससीओ सम्मेलन हो रहा है। इसमें 20 से ज्यादा देशों के नेता शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक से प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका और यूरोपीय संघ को मैसेज दे रहे हैं। शी जिनफिंग के साथ उनकी दोपक्षीय वार्ता भी होगी, जिसमें सीमा विवाद से लेकर कारोबारी साझीदारी को और बेहतर बनाने पर चर्चा हो सकती है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री इससे पहले भी एससीओ सम्मेलन में जाते रहे हैं और चीन का दौरा भी उन्होंने कई बार किया है लेकिन यह दौरा बहुत अहम है क्योंकि अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ विवाद के बीच पीएम मोदी चीन पहुंचे हैं। इससे पहले आखिरी बार वे 2018 में वुहान पहुंचे थे, जहां राष्ट्रपति शी जिनफिंग के साथ उनकी बैठक हुई थी। उसके बाद 2019 में राष्ट्रपति शी भारत के दौरे पर आए थे और तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दोनों नेताओं की बेहद आत्मीय मुलाकात हुई थी।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनफिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों के बीच दोपक्षीय बातचीत भी हुई थी। इस बातचीत के बाद भी दोनों देशों ने सीमा विवाद सुलझाने में तेजी से पहल की और कई इलाकों में दोनों देशों की सेना पीछे हटी। बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, ‘सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे संबंधों की नींव बनी रहनी चाहिए।
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