नई दिल्ली। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आय़ुक्त ने दावा किया कि आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की पूरी तैयारी की है। उन्होंने साफ कहा कि एक भी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटेगा और एक भी अपात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं रहेगा। इससे पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का मामला उलझता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नियुक्त न्यायिक अधिकारी 60 लाख विचाराधीन मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
बहरहाल, मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव से जुड़े सवाल को भी टाल दिया। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक दलों या राजनीति की बातों में नहीं उलझना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आयोग मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करने के लिए चारों राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावों के दौरान सभी मतदान केंद्रों पर सौ फीसदी वेबकास्टिंग की सुविधा देगा। उन्होंने कहा कि तारीखों की घोषणा के साथ आचार संहिता लागू हो गई और अब कोई राज्य नई घोषणाएं नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की राजनीतिक हिंसा को चुनाव आयोग बरदाश्त नहीं करेगा। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अभी तक जो घटनाएं हुईं वे आचार संहिता लागू करने के पहले हुईं। आज के बाद एक्शन लिया जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी साफ कर दिया कि घोषणा से पहले पार्टियों ने जो भी ऐलान किए वो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पिछले 12 महीने में चुनाव आयोग ने पारदर्शिता लाने के लिए कई नए प्रयोग किए। उन्होंने एसआईआर को इसी प्रयोग का हिस्सा बताया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सभी उम्मीदवारों के हलफनामे सहित चुनाव से जुड़ी सारी जानकारी एक ऐप पर उपलब्ध होंगे। किसी भी बूथ पर 12 सौ से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे।


