नई दिल्ली। सीबीएसई की 12वीं की बोर्ड परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम का काम करने वाली कंपनी कोएम्प्ट को ठेका देने के मामले में हुई गड़बड़ियों की पोल खोलने वाले झारखंड के छात्र सार्थक सिद्धांत मंगलवार को शिक्षा मामले की संसदीय समिति के सामने पेश हुए। सार्थक ने दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने ओएसएम प्रणाली के लागू होने और इसके टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों पर अपनी बात रखी। इससे पहले सार्थक ने एक वीडियो बना कर गड़बड़ियों को सबके सामने रखा था।
उन्होंने मंगलवार को संसदीय समिति से कहा, ‘मेरे ब्लॉग के अनुसार कम से कम 15 खामियां हैं’। गौरतलब है कि सार्थक ने अपने वीडियो में बताया था कि कैसे एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका देने के लिए टेंडर की शर्तें बदली गईं। स्कैन की क्वालिटी घटाई गई और साथ ही टर्नओवर की शर्त भी बदली गई। उन्होंने 15 कमियां बताई थीं, जिसकी जानकारी संसदीय समिति को भी दी। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई से कोएम्प्ट को टेंडर देने को लेकर बोर्ड से रिपोर्ट मांगी।
संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बताया, ‘सार्थक ने समिति के सामने अपनी बात रखी है। अब समिति उनके उठाए गए मुद्दों और सीबीएसई के जवाबों पर विचार करेगी’। लोकसभा और राज्यसभा के कुल 31 सदस्यों वाली इस समिति ने नीट परीक्षा के पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मामले की भी सुनवाई की है। इस मामले में एनटीए के सदस्यों की पेशी भी समिति के सामने हुई थी। हालांकि नीट यूजी के पेपर लीक का मामला कोर्ट तक ले जाने वाले डॉक्टरों के समूह को भाजपा सांसदों ने एनटीए के सामने नहीं पेश होने दिया।


