नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 152 सीटों के लिए होने वाले मतदान से ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की एक याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखी टिप्पणी की। यह मामला ममता बनर्जी का चुनाव प्रबंधन संभालने वाली संस्था आईपैक पर ईडी के छापे से जुड़ी है। छापे के दौरान ममता बनर्जी ने मौके पर पहुंच गई थीं। ईडी ने आरोप लगाया है कि ममता ने उसके कामकाज में बाधा डाली।
सर्वोच्च अदालत ने ईडी की कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दखल को गलत ठहराया। अदालत ने कहा, ‘किसी भी राज्य का सीएम ऐसा करता है तो यह लोकतंत्र को खतरे में डालना है’। जस्टिस कुमार ने कहा, ‘यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है’। गौरतलब है कि आठ जनवरी को ईडी की टीम ने आईपैक के प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दफ्तर पर छापा मारा था। छापेमारी के बीच ममता प्रतीक के घर पहुंच गईं थीं और कुछ दस्तावेज लेकर चली गईं।
बाद में ईडी ने ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस अधिकारियों पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर की। इस पर पहले भी सुनवाई हुई है। लेकिन संयोग है कि मतदान से एक दिन पहले फिर सुनवाई हुई और कोर्ट ने ममता को फटकार लगाई। बहरहाल, बुधवार की सुनवाई में ममता की ओर से वरिष्ठ अभिषेक सिंघवी ने दलील रखी। उन्होंने कहा, ईडी को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ उनका काम है, अधिकार नहीं। ईडी का अधिकारी जब काम कर रहा है, तो वह सिर्फ ‘सरकारी कर्मचारी’ है। वह अपने विभाग से अलग किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह असल में किसी एक व्यक्ति का मामला है। इसे पूरे सिस्टम या लोकतंत्र का विवाद बताना सही नहीं। अदालत ने कहा, ‘संविधान बनाते समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री किसी जांच एजेंसी के दफ्तर में पहुंच जाएगा’। आदे अदालत ने कहा, ‘सिर्फ कानूनी सिद्धांत से काम नहीं चलेगा। हमें जमीन की हकीकत भी देखनी होगी। संविधान की व्याख्या समय के साथ बदलती रहती है। हर नए हालात में कोर्ट को नए सिरे से सोचना पड़ता है’।


