न्यूयॉर्क। अमेरिका ने इजराइल के लिए वीटो का इस्तेमाल किया है। उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी के गाजा में युद्धविराम कायम करने वाले प्रस्ताव पर वीटो लगाया। यूएनएससी में बुधवार को इसके लिए वोटिंग हुई जिसमें 15 में से 14 देशों ने गाजा में युद्धविराम के पक्ष में वोटिंग की। प्रस्ताव में सभी बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता प्रतिबंधों को हटाने की भी मांग की गई थी। अमेरिका इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाला एकमात्र देश था। अमेरिका ने इसे रोकने के लिए अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किया।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत डोरोथी शिया ने कहा कि यह प्रस्ताव सीजफायर के ‘कूटनीतिक प्रयासों’ को कमजोर करेगा। इस प्रस्ताव को यूएनएससी के 10 देश अल्जीरिया, डेनमार्क, ग्रीस, गयाना, पाकिस्तान, पनामा, कोरिया गणराज्य, सिएरा लियोन, स्लोवेनिया और सोमालिया ने मिलकर पेश किया था, जिस पर ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन ने भी सहमति जताई थी। गौरतलब है कि ये चारों देश वीटो पावर वाले हैं।
वोटिंग शुरू होने से पहले कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत डोरोथी शिया ने कहा, ‘अमेरिका इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है, और इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इस संघर्ष के शुरू होने के बाद से ही अमेरिका ने बहुत स्पष्ट रुख अपनाया है कि इजराइल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है’। शिया ने कहा कि, ‘हमें याद रखना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र ने हमास को ‘आतंकवादी’ संगठन नहीं माना है। हम किसी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे जो हमास की निंदा नहीं करता और जो हमास से हथियार छोड़ने और गाजा छोड़ने की मांग नहीं करता है’।
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