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जब हम विकसित होंगे तो क्या होगा?

भारत के विकसित भारत बनने में अभी 21 साल का समय बाकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मई को मंत्रिपरिषद की बैठक में कहा कि यह उनकी सरकार के लिए सिर्फ एक वादा नहीं, बल्कि संकल्प है। संकल्प इतना बड़ा है कि इसकी गूंज चौतरफा सुनाई देती है। भाजपा के नेता तो कोई भी बात बिना विकसित भारत का जुमला बोले कह ही नहीं रहे हैं। वे तो खाना खाने और फारिग होने भी यह कहते हुए जा रहे हैं कि विकसित भारत के लिए ऐसा कर रहे हैं। एफएम रेडियो पर सुनने को मिला कि विकसित भारत के लिए लोग जनगणना में हिस्सा लें।

सोचें, अंग्रेजों के जमाने से हर 10 साल पर जनगणना होती थी। दूसरे विश्वयुद्ध के समय भी जनगणना नहीं रूकी थी। लेकिन यह सरकार 10 साल पर जनगणना नहीं करा सकी। 15 साल के बाद जनगणना हो रही है और वह विकसित भारत के लिए हो रही है!

बहरहाल, कसमें, वादों आदि के लिए तो हिंदी फिल्म के एक गाने में सुना है कि ये यूं ही होते हैं इनका क्या है लेकिन संकल्प तो संकल्प होते हैं। सो, उम्मीद करनी चाहिए और प्रार्थना भी करनी चाहिए कि विकसित भारत का संकल्प पूरा हो। 2047 में जब भारत विकसित होगा उस समय तक देश की आबादी 160 करोड़ से ज्यादा होगी। अगर विकसित भारत का संकल्प पूरा होता है तो इतनी बड़ी आबादी का जीवन बेहतर होगा। तभी सरकार से यह जानने की इच्छा हो रही है कि जब देश विकसित होगा तो क्या क्या होगा? अक्षय कुमार की एक फिल्म का गाना है, ‘जब नौकरी मिलेगी तो क्या होगा? जिस्म पे सूट होगा, पांव में बूट होगा, हाथों में गोरी का हाथ होगा’।

ऐसे ही जब भारत विकसित होगा तो क्या क्या होगा? यह सरकार को अभी बता देना चाहिए। ध्यान रहे विकसित भारत एक बड़ी अस्पष्ट सी बात है। कुछ भी करके आप कह सकते हैं कि भारत विकसित हो गया। जैसे कहा गया कि भारत खुले में शौच से मुक्त हो गया। हालांकि राजधानी दिल्ली में ही सुबह कहीं निकलिए तो लोग हाथ में बोतल लेकर जंगल या रेलवे ट्रैक की ओर जाते दिख जाते हैं। इसलिए बहुत जरूरी है कि एक एक बिंदु स्पष्ट कर दिया जाए कि भारत विकसित होगा तो उसमें क्या क्या होगा।

मिसाल के तौर पर भारत की प्रति व्यक्ति आय अभी 28 सौ डॉलर यानी 2.45 लाख रुपए सालाना के करीब है।

अगर विकसित देश के तौर पर ब्रिटेन को लेते हैं, जिसे पीछे छोड़ने का दावा पिछले दिनों किया गया था तो उसकी प्रति व्यक्ति आय 60 हजार डॉलर यानी करीब 55 लाख रुपए के करीब है। अगर एशिया के विकसित देश की बात करें तो जापान ले सकते हैं। उसकी प्रति व्यक्ति आय भी करीब 45 हजार डॉलर यानी 40 लाख रुपए के करीब है। अगले 21 साल में तो यह काफी बढ़ जाएगी फिर भी अभी के पैमाने से भी हम इनके कितने करीब पहुंचेंगे यह बता देना चाहिए। क्या 2047 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय इन विकसित देशों की अभी की स्थिति के एक तिहाई या एक चौथाई यानी 10-12 लाख से 15-16 लाख रुपए सालाना तक पहुंचेगी?

ऐसे ही जब भारत विकसित होगा तो उससे आगे सिर्फ चीन और अमेरिका की अर्थव्यवस्था होगी। अभी भारत की अर्थव्यवस्था चार ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि चीन की करीब 20 ट्रिलियन डॉलर और अमेरिका की 30 ट्रिलियन डॉलर की है। यानी अर्थव्यवस्था के आकार में चीन भारत से पांच गुना बड़ा है और अमेरिका साढ़े सात गुना बड़ा है। उस समय यह अंतर कितना होगा? 2047 में इनकी अर्थव्यवस्था का जो आकार होगा क्या उसके आधे तक भारत पहुंच जाएगा?

विकसित होने का एक बड़ा पैमाना प्रदूषण और वायु की गुणवत्ता होती है। भारत में पूरे साल औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई डेढ़ सौ के करीब होता है और सर्दियों में यह पांच सौ के ऊपर चला जाता है। अभी भीषण गर्मी के बीच भी ग्रैप की पहली श्रेणी की पाबंदियां लगी हैं क्योंकि हवा प्रदूषित है। दूसरी ओर जापान में साल का औसत एक्यूआई 40 से 60 के बीच होता है। क्या भारत विकसित होगा तो यहां भी एक्यूआई विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से तय मानक के मुताबिक होगा? यह बात पानी और खाने पीने की चीजों की शुद्धता के बारे में भी स्पष्ट होनी चाहिए। ध्यान रहे विकसित देशों में लोगों के घरों में शुद्ध पानी सप्लाई होता है और उन्हें आरओ की जरुरत नहीं होती है। वे सीधे नल से निकाल कर पानी पीते हैं।

इस तरह के कई पैमाने हैं, जिनके बारे में अभी स्पष्टता होनी चाहिए। जैसे जापान में किसान परिवारों की आय 40 से 45 लाख रुपए सालाना है, जबकि भारत में किसान परिवार की आय डेढ़ लाख रुपए सालाना की है। ऐसे किसानों को प्रधानमंत्री की ओर से सम्मान निधि के नाम पर पांच सौ रुपया महीना दिया जाता है। इसी तरह प्रति व्यक्ति डॉक्टर की उपलब्धता, प्रति व्यक्ति अस्पताल के बिस्तर की उपलब्धता, छात्र व शिक्षक का अनुपात, प्रति व्यक्ति रिसर्च का व्यय, प्रति व्यक्ति पौष्टिक भोजन की उपलब्धता, प्रति व्यक्ति बिजली की उपलब्धता, प्रति व्यक्ति सार्वजनिक परिवहन सुविधा आदि कैसी होगी, यह अभी बता देना चाहिए।

जिन 80 करोड़ लोगों को पांच किलो अनाज मिलता है उनकी उस समय क्या स्थिति होगी यह भी बताना चाहिए। भारत विकसित हो जाएगा तो खेल, साहित्य, विज्ञान और कला के क्षेत्र में क्या स्थिति होगी? यह सवाल इसलिए है क्योंकि विकसित देश नोबल, बुकर और ओलंपिक के पदक जीतते हैं। इन क्षेत्रों में भारत का रिकॉर्ड बहुत खराब है। यह भी बताना चाहिए कि देश के लोगों के जीवन में खुशहाली आएगी या नहीं? खुशहाली के इंडेक्स में भारत 116वें स्थान पर है।

ध्यान रहे विकसित भारत एक अस्पष्ट अवधारणा है, जिसके बारे में स्पष्टता की जरुरत है। कई मायने में भारत अब भी विकसित है। स्पेस के मामले में भारत की उपलब्धियां बहुत बड़ी हैं। इस मामले में भारत दुनिया के चार देशों में शामिल है। डीआरडीओ ने ऐसी मिसाइल क्षमता विकसित कर ली है, जो दुनिया के तीन या चार देशों के पास है। भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है। लेकिन ये उपलब्धियां तीन दशक पहले हासिल हो गई थीं। इसके बावजूद इनके आधार पर नहीं कहा जा सकता है कि भारत विकसित हो गया। विकसित होने का अर्थ है कि नागरिकों के जीवन की स्थितियां विकसित देशों के जैसी होंगी। उनके कुछ पैमाने ऊपर बताए गए हैं। खुद भारत सरकार का नीति आयोग टिकाऊ विकास के कुछ पैमाने तय करता है। उन सभी पैमानों पर भारत कहां होगा, यह बताना चाहिए ताकि 2047 में उस आधार पर आकलन हो सके।

By अजीत द्विवेदी

संवाददाता/स्तंभकार/ वरिष्ठ संपादक जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से पत्रकारिता शुरू करके अजीत द्विवेदी भास्कर, हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ में सहायक संपादक और टीवी चैनल को लॉंच करने वाली टीम में अंहम दायित्व संभाले। संपादक हरिशंकर व्यास के संसर्ग में पत्रकारिता में उनके हर प्रयोग में शामिल और साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और फिर लगातार ‘नया इंडिया’ नियमित राजनैतिक कॉलम और रिपोर्टिंग-लेखन व संपादन की बहुआयामी भूमिका।

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