nayaindia mohan yadav ujjain जिस मिथक को राष्ट्रपति नहीं तोड़ पाए उसे मुख्यमंत्री ने तोड़ा...?
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जिस मिथक को राष्ट्रपति नहीं तोड़ पाए उसे मुख्यमंत्री ने तोड़ा…?

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भोपाल। भारत की पुण्य नगरियों के साथ अनेक किंवदंतियाँँ व मिथक जुड़े हुए है, इसी तरह मध्यप्रदेश की पवित्र नगरी अवंतिका (उज्जैन) के साथ भी अनेक किंवदंतियाँ व मिथक जुड़े हुए है और पिछली कई शताब्दियों से उनका पालन भी हो रहा है, इन्हीं मिथकों या किंवदंतियों में से अवंतिका (उज्जैन) के बारे मंे करीब दो शताब्दियों से यह मिथक चली आ रही है कि चूंकि उज्जैन के राजा भगवान महाकाल है, इसलिए इस नगर में देश या प्रदेश का कोई भी राजा या राजप्रमुख रात्रि विश्राम नहीं कर सकता और यदि कोई मुखिया यहां रात्रि विश्राम करेगा तो उसका जीवन खतरें में पड़ सकता है, अब यह तो उज्जैन के किसी इतिहास में उल्लेख नहीं है कि इस किंवदंती का जन्मदाता कौन है, किंतु ऐसा माना जाता है कि जब तत्कालीन ग्वालियर स्टेट में उज्जैन शामिल था, तब संभवतः तत्कालीन सिंधिया शासकों ने ही इस किंवदंती को जन्म दिया था और उन्होंने ही उज्जैन दौरे के समय रात्रि विश्राम हेतु उज्जैन की सीमा से बाहर कालियादह महल बनवाया था और वे जब भी उज्जैन आते थे तो कालियादह महल में ही रात्रि विश्राम करते थे।

यह तो हुई किंवदंती के जन्म की बात। किंतु आश्चर्य यह कि पिछली दो शताब्दियों से चली आ रही इस किंवदंती को किसी भी देश या प्रदेश के शासक ने तोड़ने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उज्जैन शहर की तत्कालीन सीमा से बाहर विश्राम गृह (सर्किट हाउस) बनवा कर उसका पालन किया। यहां तक कि भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद प्रथम कालिदास समारोह का उद्घाटन कराने के लिए उज्जैन आए तब उनके रात्रि विश्राम के लिए फटाफट उज्जैन की तत्कालीन सीमा से बाहर सर्किट हाउस (विश्राम गृह) बनवाया गया और वे उसी में रूके। यही नहीं, इस किंवदंती का परिपालन उज्जैन निवासी प्रथम मुख्यमंत्री स्व. प्रकाशचंद सेठी जी ने भी किया, सत्तर के दशक में जब वे मुख्यमंत्री थे, तब जब भी उज्जैन आते थे, तब वे अपने पैतृक निवास में नहीं बल्कि सर्किट हाउस (विश्राम गृह) में ही रात्रि विश्राम करते थे।

किंतु अब इस दो सौ साल पुरानी मिथक को मौजूदा उज्जैन निवासी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तोड़ दिया और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब अपने गृह नगर उज्जैन गए तो उन्होंने अपने निवास पर ही रात्रि विश्राम किया, जब उनसे इस मिथक के बारे में सवाल किया गया तो उनका जवाब था कि- ‘‘महाकाल तो सिर्फ उज्जैन के ही नहीं पूरे ब्रह्मण्ड के राजा है और इसी ब्रह्मण्ड में हजारों राजा-महाराजा निवास करते है, इसलिए उज्जैन के बारे में फैलाई गई यह केवल भ्रांति है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।’’ इस प्रकार मौजूदा नवागत मुख्मंत्री डॉ. मोहन यादव ने पवित्र नगरी उज्जयिनी के बारे में कई बरसों से चली आ रही एक किवंदंती को खत्म कर दिया। उम्मीद है कि वे अवंतिका के बारे में अब तक चली आ रही अन्य कई किंवदंतियों को भी इसी तरह झूठा व कपोलकल्पित साबित कर देगें।

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