nayaindia Loksabha election 2024 लोकसभा चुनाव कहीं बेसब्री तो कहीं उदासीनता
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लोकसभा चुनाव कहीं बेसब्री तो कहीं उदासीनता

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भोपाल। वैसे तो 2019 में अप्रैल – मई लोकसभा के चुनाव हुए थे। इस बार कुछ पहले चुनाव कराने की अटकलें भी चल रही है। भाजपा के रणनीतिकार राम मंदिर मुद्दे पर बने माहौल के कारण लोकसभा चुनाव के लिए बेसब्र दिखाई दे रहे हैं। वहीं विपक्षी दल कहीं गठबंधन तो कहीं प्रत्याशियों के चयन के कारण कोई उतावलापन नहीं दिखा रहे हैं। दरअसल, प्रदेश में भाजपा विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज करने के बाद सभी 29 लोकसभा सीट जीतने का दावा कर रही है और इसके लिए तैयारी भी तेज हो गई है। प्रत्याशी चयन के लिए भी पार्टी संगठन स्तर पर फीडबैक लेना प्रारंभ कर दिया है। पार्टी की पूरी रणनीति विधानसभा चुनाव के पैटर्न पर लोकसभा चुनाव लड़ने की है। जिन 10 सीटों पर विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा है वहां पर फरवरी माह में ही प्रत्याशी घोषित हो सकते हैं। इसके अलावा जिन सात सांसदों को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया गया था उनमें से पांच सीटों पर सांसद विधायक बन चुके हैं जबकि सतना सांसद गणेश सिंह और मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते चुनाव हार गए हैं ऐसे में इन सात सीटों पर भी पार्टी बेहतर उम्मीदवारियों की तलाश में हैं।

बहरहाल, पार्टी सभी 29 सीट जीतने का दावा कर रही है। उसके लिए छिंदवाड़ा पर बहुत पहले से फोकस बनाया हुआ था और वहां पर किसी दिग्गज नेता को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी नाम चर्चाओं में है। पिछले लोकसभा चुनाव में जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे तब उनके बेटे नकुलनाथ लगभग 38000 वोटो से ही चुनाव जीत पाए थे और तभी से पार्टी 2024 का लक्ष्य लेकर चल रही है लेकिन छिंदवाड़ा के अलावा मुरैना, भिंड, ग्वालियर, मंडल, टीकमगढ़, बालाघाट, धार, खरगोन और रतलाम लोकसभा क्षेत्र भी विधानसभा चुनाव में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के कारण पार्टी की निगाहों में है। यहां बेहतर प्रत्याशियों के साथ-साथ बेहतर जमीनी जमावट अभी से की जाने लगी है। पार्टी विधानसभा चुनाव में हारे उन नेताओं को भी मैदान में उतार सकती है जो दमखम के साथ चुनाव लड़ सके। मसलन शिवराज सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा, अनूप मिश्रा को भी मैदान में उतारा जा सकता है। शिवराज सिंह चौहान को छिंदवाड़ा के साथ-साथ भोपाल और विदिशा से भी मैदान में उतारने की चर्चा है। कुछ राज्यसभा सदस्यों को भी लोकसभा का चुनाव लड़वाया जा सकता है। जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, कविता पाटीदार, सुमेर सिंह सोलंकी का नाम विशेष रूप से चर्चा में है।

वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में भी प्रत्याशियों को लेकर चिंतन मंथन चल रहा है। पार्टी का सबसे ज्यादा जोर दिग्गज नेताओं को लोकसभा चुनाव लड़ने पर रहेगा यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को छिंदवाड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राजगढ़ से लोकसभा का चुनाव पार्टी लड़ा सकती है। उसके अलावा पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह को मुरैना से वहीं फूल सिंह बरैया को भिंड से और ग्वालियर सीट पर शोभा सिकरवार को टिकट दिया जा सकता है। ग्वालियर में प्रवीण पाठक भी पार्टी के पास एक बेहतर विकल्प के रूप में है जबकि गुना संसदीय सीट से के.पी. सिंह को पार्टी मैदान बता सकती है। जबलपुर लोकसभा सीट से तरूण भनोट या विनय सक्सेना, खंडवा लोकसभा सीट से अरुण यादव और इंदौर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को मैदान में उतरने की रणनीति पर मंथन हो रहा है। झाबुआ, रतलाम, लोकसभा सीट पर कांतिलाल भूरिया या डॉक्टर हीरालाल अलावा प्रत्याशी हो सकते हैं।

कुल मिलकर लोकसभा चुनाव के लिए दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी चयन पर फोकस कर रहे हैं। भाजपा में जहां माहौल की अनुकूलता को देखते हुए दावेदारों की संख्या ज्यादा है पार्टी की रणनीतिकार चुनाव जल्दी चाहते हैं। वहीं विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन के बाद ही चुनाव की घोषणा की मंशा रखते हैं लेकिन साथ ही अंदर ही अंदर तैयारी भी चल रही है जिससे जब भी चुनाव हो पार्टी उस समय के लिए चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहे।

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