nayaindia Donald Trump ट्रंप की गिरफ्तारी के बनते अवसर?
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ट्रंप की गिरफ्तारी के बनते अवसर?

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डोनाल्ड ट्रंप को जल्द मुकदमे का, गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है। पूर्व राष्ट्रपति को एक चिट्ठी भेजी गई है। वह यह बताती है कि 2020 केचुनाव मेंहारने के बाद सत्ता पर काबिज रहने के हथकंड़ों पर उन्हे फेडरल मुकद्दमे का सामना करना पड़ेगा।इस मामले की जांच कर रहे विशेष प्रॉसिक्यूटरजैक स्मिथ ने बचावपक्ष को सूचित कियाहै कि जांचकर्ताओं को ट्रंप के अपराधी होने के साक्ष्य मिले।

ट्रंप ने अपनी ख़ास शैली में सोशल मीडिया में इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जेक स्मिथ को ‘पागल’बताते हुए कहा कि,“उन्हें (ट्रूप) 6 जनवरी की घटनाओं कीग्रेंड जूरी द्वारा की जा रही जांच में निशाना बनाया जा रहा है”। ट्रंप ने खुद लिखा है किइस प्रकार के पत्र के बादलगभग हमेशा गिरफ्तारी और अभियोजनहोता है।ट्रंप का इन दिनोंचुनावी कैंपेन ही इस बात पर है किवे राजनैतिक बदले की कार्यवाही के शिकार हैं।

यह जेक स्मिथ द्वारा लगाया गया दूसरा अभियोग है। वे ही ट्रंप द्वारा व्हाईट हाउस से गोपनीय दस्तावेज अपने साथ ले जाने,राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने, दस्तावेजों को वापिस लेने केसरकारी काम में बाधा डालने के मामले में भी अभियोजक हैं।इसके अलावा ट्रंप पर मेनहट्टननमें सन् 2016 के चुनाव के पहले एक पोर्न स्टार को चुप रहने के बदले धन दिए जाने कामामला भी है। इस मामले में उनपर फुल्टन काउंटीमें जिला एटार्नी द्वारा आरोप लगाए जानेकी संभावना है। वे ट्रम्प द्वारा राज्य में सन् 2020 में हुई चुनावी हार को पलटने केप्रयासों से जुड़े मामले की बी जांच कर रहे हैं।

जाहिर है ट्रंप एक के बाद एकमुकद्दमों, अपराधों के आरोपों और कानूनी झमेलों के दलदल में फंसते जा रहे हैं।बावजूद इसकेराष्ट्रपति चुनाव अभियान जारी है, जिसमें वे अपने सभी रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वियों से आगे हैं।उन्हें जेल जाना पड़ सकता है, इससे बेफिक्र ट्रंप चीख-चीखकर जनता को कह रहे हैं कि2020में उन्हें गलत तरीके से हराया गया और मुकद्दमें उन्हें ‘‘प्रताड़ित करने”के लिएहो रहे है। कुछ समय पहले उन्होंने अपने समर्थकों की एक भीड़ के आगे कहा था,‘‘मैं आपका न्यायहूं। मैं आपका प्रतिरोध हूं”।

उन्का ताजा मिले अभियोजन पत्र के बारे में कहना है- यह देश के लिए एक ‘‘डरावनी खबर”है, एक कालादिन है और बाइडन की “अपने सबसे बड़े राजनैतिक विरोधी”को गिरफ्तार करने कीकोशिश है।

हैरानी की बात है किइस सबके बीच ट्रंप का समर्थन बढ़ रहा है। साफ है‘मेक अमरीका ग्रेट अगेन’टोली के चलते अमिरिकी समाज विभाजित हो गया है। वेऔर उनके सहयोगी तमाम अनिश्चिताओं के बावजूद सन् 2024 के चुनाव में जोरदार जीत केप्रति आश्वस्त हैं।

न्यूयार्क टाईम्स में हाल में छपी एक खबर के अनुसार यदि ट्रंप 2025 में व्हाइट हाउस मेंवापिस लौटते हैं तो राष्ट्रपति के हाथों में और अधिक शक्तियां सौपने की योजना पर काम होगा। अभी की तुलना में राष्ट्रपति का सरकार पर सीधानियंत्रण बहुत बढ़ जाएगा। प्रशासन इन-वेटिंगतैयार है जो वर्तमान मेंअमेरिका फर्स्ट पालिसी इंस्टीटयूट (एएफपीआई) नामक थिंक टैंक के रूप में काम कर रहा है। इसके 172 कर्मियों में से आठ ट्रंप प्रशासन की केबिनेट के सदस्य थे।इसमें20 अन्यराजनीतिज्ञ भी नियुक्त किए गए हैं। एएफपीआई ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की तैयारी के लिएनिर्मित सबसे नया थिंक टैंक है, लेकिन यह सबसे बड़ा नही है। हेरिटेज फाउंडेशन, जिसेरोनाल्ड रीगन की ‘क्रांति’की तैयारियों में अपनी भूमिका पर गर्व है, का अपनाअभियान अलग है।इसका नेतृत्व पॉल डेन्स के हाथ में है, जो एक वकील हैंऔर जो ट्रंप के कार्यकाल में व्हाइट हाउस के आफिस ऑफ पर्सनल मेनेजमेंट मेंकाम करते थे।

सोचे, कानूनी अफरातफरी के बीच भी ट्रंप भविष्य के अपने प्रशासन को बनाने के काम में लगे हैं।

ट्रंप के लोग और विरोधी आगे की होनी-अनहोनी की तैयारी कर रहे हैं।मतलब यदि जो अपरिहार्य है वह हो गया तो क्याकरना होगा?जैसे ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका यदि नाटो छोड़देता है, तो क्या किया जाएगा? इसके प्लान बी का मसविदा यूरोप में तैयार हो रहा है। यही कारण है कि फ्रांसके राष्ट्रपति ने यूरोपियन संघ की सुरक्षा के संबंध में बोलते हुए कहा कि यूरोप अपनी साझा सुरक्षा और स्थिरता के मसलों को अमेरिकी मतदाताओं की इच्छाके हवाले नहीं कर सकता। उनके इन कथनों की आलोचना हुई लेकिन सस्ती लोकप्रियता केइस दौर में यूरोप ही नहीं हर देश को अब सैन्य और आर्थिकदोनों दृष्टियों से खुद की सुरक्षा में समर्थ होना चाहिए।

जहां तक ट्रंप का सवाल है, उन्हें पहले से मालूम है कि सत्ता उनकी जेब में है।इसलिएमुकद्दमें संबंधी खबरें उन्हें और लफ्फाजी करने का अवसर देती हैं। और उनकेसमर्थक भी उनकी लफ्फाजियों को पसंद करते हैं। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

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