मुकेश अंबानी अपना बिजनेस अमेरिका तक फैला रहे हैं तो साथ ही राजनीतिक हाथ पैर भी फैला रहे हैं। उनकी कंपनी के परिमल नाथवानी झारखंड से राज्यसभा में गए तो नाथवानी के बेटे को उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी की टिकट से राज्यसभा भेजा जा रहा है। झारखंड में भाजपा के साथ जेएमएम और राजद ने अंबानी के उम्मीदवार को परोक्ष समर्थन दिया तो उत्तर प्रदेश में सपा ने उम्मीदवार ही बना दिया। इस तरह मुकेश अंबानी ने तीन राज्य और तीन पार्टियों को साधा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड की मुख्य प्रादेशिक पार्टियों सपा, राजद और जेएमएम को उन्होंने साधा है।
संभव है कि वे भाजपा और कांग्रेस जैसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों के साथ साथ इन क्षेत्रीय पार्टियों के महत्व को समझ रहे होंगे। यह भी संभव है कि आगे की राजनीतिक संभावना उनको बहुत अच्छी नहीं दिख रही हो। ध्यान रहे पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा 240 सीट पर आ गई औऱ गठबंधन की सरकार बनी। आगे हो सकता है कि तस्वीर और बदले। अगर फिर से गठबंधन की सरकारों का दौर शुरू हुआ तो उसमें तमाम प्रादेशिक पार्टियों का महत्व बढ़ेगा। तभी संभव है कि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को साधने की जरुरत समझी जा रही हो।
तभी यह देखना भी दिलचस्प है कि गौतम अडानी भी राहुल गांधी के तमाम हमले के बावजूद कांग्रेस सरकारों के साथ समन्वय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस की सरकारें उनका साथ भी दे रही हैं। कर्नाटक का मामला इसी साल अगस्त का है। नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की वह सबसे हाई प्रोफाइल मुलाकात थी, जब गौतम अडानी उनसे मिलने पहुंचे। गौरतलब है कि राज्य की एक करीब 17 किलोमीटर की सुरंग सड़क की 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजना में अडानी समूह ने सबके कम बोली लगाई है। जिस दिन गौतम अडानी की शिवकुमार से मुलाकात हुई उसके अगले ही दिन विधानसभा में सरकार ने नियमों को बदलने वाला संशोधन पास कराया ताकि सुरंग सड़क प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाली कानूनी बाधाओं को दूर किया जा सके। कांग्रेस के किसी मुख्यमंत्री का इस किस्म का सद्भाव अडानी समूह के लिए दिखाना मामूली बात नहीं है।
इससे पहले गौतम अडानी ने तेलंगाना में कांग्रेस के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात की थी। गौतम अडानी अपने बेटे करण अडानी के साथ मुख्यमंत्री से मिलने हैदराबाद गए थे। उससे पहले दोनों की मुलाकात दावोस आर्थिक मंच की बैठक के दौरान भी हुई थी। कहा जा रहा है कि ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट से लेकर डेटा सेंटर और अंबुजा सीमेंट प्रोजेक्ट में अडानी समूह तेलंगाना में बड़ी रकम निवेश कर रहा है। इससे पहले जब अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे तब भी गौतम अडानी ने उनकी सरकार के साथ बड़े निवेश का समझौता किया था।
केरल के विझिन्जम बंदरगाह के पहले चरण के उद्घाटन के समय सबने देखा कि कैसे सीपीएम की सरकार होने के बावजूद कांग्रेस के सारे नेता वहां मौजूद रहे और कांग्रेस ने आगे बढ़ कर इसका श्रेय लिया था। गौतम अडानी कुछ समय पहले ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मिलने गए थे। तभी ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों की तमाम आलोचना के बावजूद गौतम अडानी भी विपक्ष की ओर हाथ बढ़ा रहे हैं। हो सकता है कि उनको भी जमीनी राजनीतिक स्थित बदलने का कोई संकेत मिल रहा हो। हालांकि यह मानना मुश्किल है कि मोदी और शाह की सलाह के बगैर वे विपक्षी पार्टियों के साथ मेल मुलाकात बढ़ाएंगे।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



