nayaindia Vladimir Putin Russian presidential elections पुतिन जीते, समय
श्रुति व्यास

पुतिन जीते, समय मेहरबान!

Share
Vladimir Putin Russian presidential elections
Vladimir Putin Russian presidential elections

वक्त व्लादिमिर पुतिन पर मेहरबान है। वे यूक्रेन युद्ध में ‘जीत’ रहे हैं। उनके खिलाफ बगावत का नेतृत्व करने वाले येवगेनी प्रिगोझिन को विमान हादसे में मरवाने में वे कामयाब रहे हैं। और इस साल उन्होंने अपने प्रबल विरोधी अलेक्सी नवलनी को खत्म करवा दिया। इस सबके चलते उन्होंने बिना किसी खास प्रयास के और दिक्कतों व परेशानियों के बगैर एक शानदार चुनावी जीत हासिल की। यहां तक कि उजड़े और वीरान मारियूपोल ने भी मतदान किया और पुतिन की ‘पुनर्विजय’ में भूमिका अदा की। Vladimir Putin Russian presidential elections

यह भी पढ़ें: भारत का यह अंधा, आदिम चुनाव!

यह साफ़ है कि उनका राज कायम रहेगा। और रूस व बलपूवर्क हासिल किए गए कुछ अन्य इलाकों पर उनका सख्त नियंत्रण बना रहेगा। वे रूस के नए जार हैं। युद्ध जारी रहेगा बल्कि और तेज, और हिंसक, और घातक बनता जाएगा। पश्चिम व अन्य देश मूकदर्शक बने रहेंगे। पुतिन को रोकनेवाला कोई नहीं है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमेन्युल मेक्रों के यह कहने की देर थी कि युद्ध में यूक्रेन का पक्ष मजबूत करने के लिए नाटो को अपने सैनिक भेजने पर विचार करना चाहिए कि पुतिन ने एक बार फिर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी दे दी। Vladimir Putin Russian presidential elections

पुतिन की ज्यादातर बातें केवल गीदड़ भभकियां हैं। मगर वे यह मानते हैं कि वक्त उनके साथ है और इसलिए वे कुछ भी कर सकते हैं। इन हालातों में उनकी महत्वाकांक्षाएं बढ़ना स्वाभाविक है। वे यूक्रेन से भी आगे बढेंगीं। वे अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए और निष्ठुर हो जाएंगे – वे सोवियत साम्राज्य के नए जार बनना चाहेंगे, और साथ ही दुनिया का जार नही। और पश्चिमी देश व बाकी दुनिया दर्शक दीर्घा में बनी रहेगी।

यह भी पढ़ें: भाजपा के चार सांसदों ने पार्टी छोड़ी

पुतिन की चमड़ी मोटी हो चुकी है और उनका तनिक भी नुकसान नहीं हुआ है। पश्चिम द्वारा घोषित और लागू किए गए प्रतिबंधों से वे और अधिक शक्तिशाली और समृद्ध हुए हैं। आर्थिक तौर पर एवं विचारधारा की दृष्टि से पुतिन का उदय रोकने में पश्चिम विफल रहा है।

पुतिन ने 1999 में सत्ता संभाली। उन्होंने योजनाबद्ध ढंग से रूस में लोकतंत्र का गला घोंटा, पहले धीरे-धीरे और युवा शहरियों द्वारा 2010 के दशक में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद तेजी से। उनका आरोप है कि पश्चिम  उनकी सरकार के लिए समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। और इसलिए अपनी सत्ता की रक्षा के लिए वे रूस की जनता को पश्चिम के असर से मुक्त करने और अमरीका और नाटो के खिलाफ रूसियों को एकताबद्ध करने  का प्रयास कर रहे हैं। आज रूस की अर्थव्यवस्था सिकुड़ कर मध्यम आकार की बन चुकी है और दुनिया में फैलाने के लिए उसके पास पुतिनवाद के अलावा कोई और विचारधारा नहीं है। फिर भी रूस सुरक्षित है और सारी दुनिया के लिए खतरा बनने की क्षमता रखता है।बल्कि खतरा बना हुआ है। पुतिन का रूस सोवियत साम्राज्य का जार और सारी दुनिया का शहंशाह बनने को उद्यत है।

क्या कोई है जो पुतिन को रोक सके? न तो पश्चिम और ना ही उसके प्रतिबंधों में यह क्षमता है और ना ही नाटो और उसकी सैन्य शक्ति में। वैसे भी, दुनिया के गैर-ज़िम्मेदार देशों की मूर्खताएं जो कहर बरपा सकती हैं  उसकी तुलना में नाटो की ताकत कुछ भी नहीं है।

यह भी पढ़ें: मैराथन चुनाव कार्यक्रम

पुतिन को सिर्फ जनता रोक सकती है। यह ताकत केवल रूसियों के पास है। एक क्रांति इसका जरिया हो सकती है। अफसोस, वक्त उनके साथ नहीं है। उन्हें पुतिन का तख्तापलट करने के लिए क्रांति करने का न तो अवसर है, ना समर्थन हैं और न लोगों में जोश भरने वाली कोई आवाज़ है। उनके पास अलेक्सी नवलनी था, लेकिन आज वो भी नहीं है। पिछले कई सालों से उनकी बात रूस में ध्यान से सुनी जाती थी। उनमें पुतिन और उनके चमचों द्वारा फैलाए गए झूठ का भंडाफोड़ करने की क्षमता थी। नवलनी इस झूठ का पर्दाफाश में सक्षम थे पुतिन और उनके साथी मजबूत राष्ट्र के निर्माण में जुटे आदर्शवादी और सीधे-सच्चे लोग हैं। नवलनी को वहां के कुलीन वर्ग की काली करतूतों और भ्रष्टाचार का खुलासा करने में महारत हासिल थी। Vladimir Putin Russian presidential elections

यह भी पढ़ें: चुनाव की अवधि क्यों बढ़ती जा रही?

पहली बार रूस की जनता को एक अलग प्रकार की राजनीति देखने का मौका मिला था। इसके पहले तक वे राष्ट्रपति के रूप में पुतिन के अलावा किसी और की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।नवलनी आशा की किरण थे। लेकिन अब वे नहीं हैं और अँधेरे ने अपना साम्राज्य कायम कर लिया है। जनता को मानों लकवा मार गया है। कई लोग तो सड़कों पर निकलने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं और रूस छोड़ने की जुगत में हैं। हालांकि ऐसी खबरें है कि इस चुनाव में कई नागरिकों ने अपना विरोध प्रदर्शित करने के लिए मतपेटियां में स्याही उड़ेल दी, या विस्फोटकों से उन्हें नष्ट कर दिया या आग लगाने का प्रयास किया। लेकिन इससे अंतिम नतीजे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अंतर्राष्ट्रीय प्रेस का मानना है कि यह सब नवलनी से प्रेरित लोगों द्वारा ही किया गया।

यह भी पढ़ें: कांग्रेस की चिंता में कविता की गिरफ्तारी

अपने अंतिम सार्वजनिक संदेशों में से एक में नवलनी ने जनता से आव्हान किया था कि वे पुतिन के प्रति विरोध प्रदर्शित करने के लिए 17 मार्च को मतदान केन्द्रों पर जाएं और पुतिन को हराएँ। लेकिन इसका अपेक्षित प्रभाव नहीं हुआ।वक्त पुतिन का साथ दे रहा है। वे अजेय और चुनौती-विहीन बने हुए हैं। एक और जीत, जो तय है, के बाद, पुतिन, किम जोंग की तरह बन जाएंगे। रूस पहले से ही एक ऐसा राष्ट्र बन चुका है जो कुछ भी कर सकता है।  दुनिया को चौकन्ना रहने की जरूरत है। ऐसा लगता है कि 2024 अमन से महरूम रहेगा। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Naya India स्क्रॉल करें