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मैराथन चुनाव कार्यक्रम

ByNI Editorial,
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Lok sabha election 2024 schedule
Lok sabha election 2024 schedule

चुनाव कार्यक्रम को देखकर अगर मैराथन दौड़ की याद आती हो, यह कहा जाएगा कि इसमें अंत तक टिके रहने के लिए आर्थिक संसाधन, टिकाऊ चुनाव मशीनरी और अपने चुनावी नैरेटिव को आकर्षक बनाए रखने की क्षमता पूर्व शर्त बन जाती हैं। Lok sabha election 2024 schedule

लोकसभा के आम चुनाव के कार्यक्रम की खबर एक विदेशी अखबार ने इस शीर्षक के साथ प्रकाशित की है- भारत में मैराथन चुनाव कार्यक्रम का एलान। एथलेटिक्स की दुनिया में कहा जाता है कि मैराथन दौड़ में शामिल होने के लिए शारीरिक बल, अंतर्शक्ति, टिकाऊ ऊर्जा एवं गहरे धीरज की जरूरत होती है। जिन धावकों में ये गुण ना हों, वे 42.195 किलोमीटर की इस प्रतिस्पर्धा में सफल नहीं हो सकते। भारत के चुनाव कार्यक्रम को देखकर अगर इस दौड़ की याद आती हो, यह भी सहज ही कहा जाएगा कि इसमें अंत तक टिके रहने के लिए कई खास पहलू अनिवार्य हो जाते हैं। Lok sabha election 2024 schedule

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आर्थिक संसाधन, लंबे समय तक सक्रिय रह सकने वाली चुनाव मशीनरी और अपने चुनावी नैरेटिव को आकर्षक बनाए रखने की क्षमता इनमें शामिल हैं। चुनावी चंदे और प्रचार तंत्र की वर्तमान स्थिति देखें, तो कहा जाएगा कि इन तकाजों को पूरा करना विपक्षी दलों के लिए एक कठिन चुनौती है। वैसे तो सात चरणों में लोकसभा का चुनाव होना अब नई बात नहीं रही, लेकिन इस बार एक खास पहलू यह है कि अनेक बड़े राज्यों में भी चुनाव को सात चरणों तक खींच दिया गया है। Lok sabha election 2024 schedule

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इससे यह कहने की स्थिति बनती है कि मैच शुरू होने के पहले ही पिच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के अनुकूल हो गई है। चूंकि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सातों चरणों में वोट डाले जाएंगे, इसलिए वहां हर मतदान के दिन करीब के चुनाव क्षेत्रों में प्रचार करने की गुंजाइश बनी रहेगी। वर्तमान रुझान यह है कि प्रधानमंत्री के भाषणों का टीवी चैनल सीधा प्रसारण करते हैँ।

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इस तरह मतदान के समय भी उनका संदेश मतदाताओं तक पहुंचता रहेगा। मतलब यह कि ऐसे चुनाव कार्यक्रम के कारण प्रचार संबंधी आदर्श चुनाव आचार संहिता बेमायने हो गई है। फिर मतदान के बाद 40 दिन तक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीय ढंग से रक्षा और सुरक्षा की कठिन चुनौती बनी रहेगी। जिस समय चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई तरह के संदेह वातावरण में हैं, कहा जा सकता है कि ऐसे चुनाव कार्यक्रम से उन्हें दूर करने में कोई मदद नहीं मिलने वाली है।

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