यह कमाल का संयोग है कि पिछले 12 साल में भाजपा की टिकट पर जो भी नेता अमृतसर सीट से लड़ा वह चुनाव हारा लेकिन हारने के बाद उसे बहुत बड़ा फायदा हुआ। एक के बाद एक तीन नेताओं के साथ यह संयोग हुआ है। ताजा संयोग तरनजीत सिंह संधु का है, जिनको दिल्ली का उप राज्यपाल बनाया गया है। वे 2024 में अमृतसर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला से चुनाव हार गए थे। अमेरिका में भारत के राजदूत रहे तरनजीत संधु हारने के बाद से बियाबान में भटक रहे थे। लेकिन उनको दिल्ली का उपराज्यपाल बना कर पुनर्वास किया गया है।
उनसे पहले 2019 में अमृतसर से लोकसभा चुनाव हरदीप सिंह पुरी लड़े थे। उनको भी कांग्रेस के औजला ने हरा दिया था और उसके बाद पुरी केंद्र में मंत्री बने थे। वे अभी तक केंद्र सरकार में मंत्री हैं। उनको उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया। वे शहरी विकास मंत्री रहे और अभी पेट्रोलियम मंत्री हैं। एपस्टीन फाइल्स के विवाद के बावजूद मंत्री बने हुए हैं।
उससे भी पहले अमृतसर में भाजपा के बड़े नेता अरुण जेटली चुनाव हारे थे। उनको कांग्रेस के दिग्गज कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने हराया था। बाद में तो कैप्टेन खुद ही भाजपा में चले गए। लेकिन 2014 में अमृतसर सीट पर हारने के बाद अरुण जेटली देश के वित्त और रक्षा मंत्री बने। सो, जेटली से शुरू हुआ सिलसिला पुरी से होते हुए संधु तक जारी है।
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