उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद का चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस के महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने निजी रूप से उनसे मिल कर कहा था कि वे विपक्ष के साझा उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद में जाएं। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी उद्धव ठाकरे से यही अपील की थी। लेकिन उद्धव ने खुद विधान परिषद में जाने की बजाय अपनी पार्टी के नेता अंबादास दानवे को उम्मीदवार बना दिया है। यह कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी दोनों को कबूल नहीं है। बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियां ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। खासतौर से कांग्रेस नाराज है।
शरद पवार की एनसीपी को कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि उद्धव ठाकरे ने अपना समर्थन देकर शरद पवार को राज्यसभा भेजा था। इसलिए उनकी पार्टी उद्धव की पसंद का सम्मान करेगी। लेकिन कांग्रेस को लग रहा है कि उसके साथ धोखा हुआ है। कांग्रेस ने राज्यसभा में शरद पवार को समर्थन दिया और विधान परिषद में उद्धव को समर्थन दे रही थी। लेकिन अगर उद्धव नहीं जाते हैं तो कांग्रेस का कहना है कि इस सीट पर उसका दावा है। तभी कांग्रेस 12 मई को होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। अगर बिना सहमति के कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारा तो विपक्ष को मिलने वाली इकलौती सीट भी उसके हाथ से निकल जाएगी। इसकी संभावना कम है कि उद्धव अपना उम्मीदवार वापस लेंगे। सो, संकट सामने है। गौरतलब है कि राज्य में विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। इनमें से चार भाजपा के खाते में और दो दो सीटें शिव सेना व एनसीपी के खाते में जाएगी। एक सीट विपक्ष को मिलेगी।
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