आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट की पढ़ाई करने के बाद उनकी राजनीति आम आदमी पार्टी के साथ शुरू हुई थी। उन्होंने आप के अन्य बड़े नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ काम किया था। वहां उनक यह लिबर्टी थी कि बाकी नेताओं की तरह पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को अरविंद कह सकें। मीडिया में और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी राघव चड्ढा या दूसरे नेता अरविंद कहते थे। बहुत सम्मान देना हुआ तो अरविंद जी कह दिया। हालांकि यह भी कम ही होता था।
लेकिन भारतीय जनता पार्टी में यह नहीं चलता है। असल में भाजपा ज्वाइन करने के बाद राघव चड्ढा पिछले दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मिले तो उन्होंने बातचीत में उनको नितिन नबीन जी कह कर संबोधित किया। बताया जा रहा है कि वहां मौजूद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने राघव चड्ढा से कहा कि नाम लेने की बजाय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी कह कर संबोधित करें। यह भाजपा का कल्चर है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी नितिन नबीन को लेकर कुछ ज्यादा ही संवेदनशील हो गई है। उसको लग रहा है कि अगर प्रयास करके नहीं कराया गया तो लोग नितिन नबीन को वह सम्मान नहीं देंगे, जो दूसरे अध्यक्षों को मिलता रहा है। तभी सवाल है कि ऐसा अध्यक्ष बनाने की क्या जरुरत थी, जिसको सम्मान दिलाने के लिए इतना प्रयास करना पड़े?


