अब तो पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त हो गए हैं और एक्जिट पोल के नतीजे भी आ गए हैं, जो मोटे तौर पर नतीजों का संकेत दे रहे हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई रूक जाएगी। जिन राज्यों में चुनाव हो गए वहां छोड़ कर अब एजेंसियां उन राज्यों का रुख करेंगी, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं। असल में पिछले दिनों केंद्रीए एजेंसियों खास कर ईडी ने चुनावी राज्यों में जम कर छापेमारी की। वह छापेमारी भी ऐसे मामलों में हुई, जो कई बरस पुराने हैं और जिन मामलों में पहले कई बार छापेमारी हो चुकी है, आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आरोपी जेल काट कर निकल भी चुके हैं।
सोचें, पश्चिम बंगाल में 16 मार्च को चुनाव की घोषणा हुई और उसके 12 दिन बाद जब पहले चरण के नामांकन का काम पूरा हो रहा था। तब से लेकर 19 अप्रैल तक यानी पहले चरण का प्रचार बंद होने से दो दिन पहले तक ईडी ने आठ अलग अलग मामलों में 50 जगह छापे मारे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये सारे छापे 2020 में दर्ज एफआईआर से जुड़े मामले में मारे गए। इन मामलों में कार्रवाई काफी एडवांस स्टेज में है। पश्चिम बंगाल अपवाद नहीं है। केरल में जनवरी के महीने में 21 जगहों पर छापे मारे गए और यह मामला भी 2025 के गोल्ड स्मलिंग मामले का है। इसी तरह तमिलनाडु में 2025 के टैस्मैक घोटाले से जुड़े मामले में 2026 में चुनाव से ठीक पहले छापेमारी हुई। केरल और तमिलनाडु के दोनों मामलों में पहले छापेमारी हो चुकी है। अब पंजाब में भी छापेमारी की शुरुआत हो गई। अगले साल मार्च में वहां चुनाव होने वाले हैं।


