उत्तर प्रदेश में अगले साल मार्च में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। अब एक साल का समय बचा है और उससे पहले ऐसा लग रहा है कि राज्य में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जो कुछ हुआ उससे पार्टी के बहुत सारे नेता आहत हैं। वे इससे चुनावी नुकसान की संभावना देख रहे हैं। कहा जा रहा है कि शंकराचार्य से सुलह सफाई और उनसे माफी मांग कर उनको स्नान कराने वाली बातें इसी खेमे ने चलवाई थीं लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अड़े रहे। पार्टी के ब्राह्मण विधायक और दूसरे नेता इससे खासतौर से आहत हैं।
ऊपर से यूजीसी के दिशा निर्देश का मामला आ गया, जिसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में ही सबसे ज्यादा प्रदर्शन हुए। वाराणसी और प्रयागराज में हजारों की संख्या में छात्रों ने सड़क पर उतर कर सरकार विरोधी नारे लगाए। इससे अगड़ा और पिछड़ा का विभाजन बढ़ने का खतरा दिख रहा है। पार्टी के विधायक और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेता इससे भी परेशान हुए हैं। इस बीच एक खबर आई कि पार्टी के एक विधायक ब्रजभूषण सिंह राजपूत ने राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को बंधक बना लिया। इसकी वीडियो सबने देखी। विधायक ने कहा कि हर घर नल से जल योजना में बड़ी गड़बड़ी हो रही है। गांव के गांव खोद दिए गए हैं और पाइप नहीं बिछाई गई है। जहां पाइप बिछा दी गई है वहां पानी नहीं आ रहा है। सोचें, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे करीबी माना जाता है। वे कुर्मी जाति से आते हैं। उनको एक राजपूत विधायक ने बंधक बना लिया। इसका संदेश भी दूर तक गया है। मुख्यमंत्री के क्षेत्र के कुर्मी नेता पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से राजनीतिक संदेश बना है वह भी पार्टी को नुकसान करने वाला ही है।
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