बिहार में भाजपा और जनता दल यू दोनों ने विधानसभा चुनाव में खुल कर गैर यादव पिछड़ी जातियों की राजनीति की। दोनों पार्टियों के बड़े यादव नेताओं की टिकट कटी। नंदकिशोर यादव और रामसूरत राय जैसे नेताओं को टिकट नहीं दी गई। माना गया कि यादव बिहार के नवसामंत हैं और उनके खिलाफ वोटों की गोलबंदी आसान होती है। अब एक यादव सांसद गिरधारी यादव पर जनता दल यू ने तलवार लटकाई है। नीतीश कुमार की पार्टी ने लोकसभा स्पीकर को लिखा है कि गिरधारी यादव ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया है इसलिए उनकी सदस्यता रद्द की जाए। गिरधारी यादव बांका सीट से सांसद हैं। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन को पिछले साल विधानसभा चुनाव में राजद की टिकट दिलवाई। दूसरी ओर गिरधारी यादव का कहना है कि उनका बेटा विदेश से पढ़ कर आया है और अपने फैसले करने के लिए स्वतंत्र है। उनके ऊपर दूसरा आरोप यह है कि उन्होंने पिछले साल बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाया था और उसकी आलोचना की थी।
अब इससे जुड़े दो मुद्दे हैं। पहला तो यह है कि जैसे गिरधारी यादव के बेटे ने राजद की टिकट से विधानसभा का चुनाव लड़ा वैसे ही लोकसभा चुनाव में नीतीश सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी के बेटे सनी हजारी ने कांग्रेस की टिकट लेकर समस्तीपुर सीट पर लोजपा उम्मीदवार शाम्भवी चौधरी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। लेकिन जदयू ने अपने मंत्री महेश्वर हजारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह एसआईआर को लेकर गिरधारी यादव ने पिछले साल जुलाई में आलोचना की थी। अब जाकर 10 महीने बाद कार्रवाई क्यों हो रही है? ऐसा लग रहा है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से विदा होने की तैयारियों की बीच जदयू की ओर से अपनी पार्टी में विधायकों व सांसदों को एक संदेश दिया जा रहा है कि अनुशासनहीनता बरदाश्त नहीं होगी।
हालांकि इसमें समस्या यह है कि अगर स्पीकर गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म कर देते हैं तो बांका सीट पर उपचुनाव होगा। भाजपा किसी सीट पर उपचुनाव से बचना चाह रही है क्योंकि इस बार भाजपा के पास अपने 240 सांसद हैं और सहयोगी दलों को मिला कर भी संख्या 293 पहुंचती है। ध्यान रहे बांका सीट पर दिग्विजय सिंह एक बार निर्दलीय लड़ कर चुनाव जीते थे। बांका से महान समाजवादी नेता मधु लिमये सांसद रहे हैं। वहां उपचुनाव एनडीए के लिए परीक्षा की तरह हो जाएगा।


