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‘मुसलमान का काम नहीं करूंगा’ यह कहना अब फैशन है

पहले भी भारतीय जनता पार्टी सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण करती थी। हिंदू और मुस्लिम का मुद्दा बनाए बगैर उसके लिए चुनाव जीतना हमेशा मुश्किल काम होता था। लेकिन अब एक नया फैशन देखने को मिल रहा है। छोटे से लेकर बड़े नेता तक खुल कर कहने लगे हैं कि ‘हमको मुसलमान का वोट नहीं चाहिए’ या ‘हमको मुसलमान ने वोट नहीं दिया है’ या ‘हम मुसलमान का काम नहीं करेंगे’। पहले इस तरह के बयान नहीं दिए जाते थे। चुनाव में उम्मीदवार हर जाति, समुदाय के लोगों से वोट मांगते थे और चुनाव के बाद सबका काम करने का संकल्प करते थे। हालांकि वह दिखावा ही होता था लेकिन अब ध्रुवीकरण की राजनीति ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां इस तरह के दिखावे को भी जरूरी नहीं माना जा रहा है।

हैरानी की बात है कि इस किस्म के बयान देने वाले नेताओं के खिलाफ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कोई कार्रवाई नहीं करता है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में यह बात प्रदेश के सबसे बड़े नेता ने कही, जो मुख्यमंत्री बने। उन्होंने बार बार कहा कि हिंदू बूथों पर उनको वोट मिलें हैं और नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि वे मुसलमानों का काम नहीं करेंगे। उनकी देखा देखी अब बंगाल के ही एक भाजपा विधायक रीतेश तिवारी ने कहा है कि वे मुसलमानों का काम नहीं करेंगे। इससे पहले बिहार के एक जदयू सांसद ने इस तरह की बात कही थी लेकिन बाद में उनको सफाई देनी पड़ी थी। लेकिन अब यह बात मेनस्ट्रीम हो गई है। मुसलमानों के प्रति घृणा का खुला प्रदर्शन किया जाने लगा है।

By NI Political Desk

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