उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पीडीए बनाया है। पीडीए का अर्थ है पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक। हालांकि बीच बीच में वे कोई और अर्थ भी बताते रहते हैं। जैसे पिछले दिनों ब्राह्मणों को खुश करने के लिए कह दिया कि उनके पीडीए में पीडी का मतलब है पंडित। लेकिन असल मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है। अखिलेश ने पिछले दिनों पीडीए रथयात्रा भी शुरू की। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पीडीए यात्रा राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली से की। रायबरेली से यात्रा शुरू करने से पहले उन्होंने न तो राहुल गांधी से बात की और न कांग्रेस को भरोसे में लिया। उसमें कांग्रेस के लोह शामिल भी नहीं हुए। सो, अब कांग्रेस ने अपना पीडीए बना लिया है।
कांग्रेस पार्टी के पीडीए का मतलब है पंडित, दलित और अल्पसंख्यक। जाहिर है कि दलित और अल्पसंख्यक कांग्रेस और सपा दोनों में कॉमन हैं। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि यह आजादी के बाद से ही बना उसका फॉर्मूला है। इसी फॉर्मूले पर कांग्रेस ने इतने बरसों तक देश पर और ज्यादातर राज्यों में शासन किया। इसी फॉर्मूले को नए सिरे से साधने के लिए कांग्रेस ने ब्राह्मण नेता मोना मिश्रा को अध्यक्ष, इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और दलित समाज से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम को प्रभारी बनाया है। हालांकि मुस्लिम पूरी तरह से समाजवादी पार्टी के साथ हैं और दलित में जाटव समाज का भावनात्मक जुड़ाव अब भी बसपा और मायावती के साथ है। इमरान मसूद और राजेंद्र पाल गौतम मुस्लिम और दलित वोट कांग्रेस को दिला पाएंगे इसमें संदेह है। तभी भले कांग्रेस ने पीडीए बना लिया है लेकिन इसकी कोई भी कामयाबी इस पर निर्भर करेगी कि सपा के साथ उसका तालमेल होता है या नहीं। तालमेल हुआ तो दोनों बेहतर करेंगे अन्यथा कांग्रेस तो बहुत खराब करेगी।
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