देश की सबसे अमीर नगरपालिका बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी है। इसका बजट कई राज्यों के बजट से बड़ा है। पिछले कई बरसों से इसका चुनाव नहीं हुआ है। लेकिन चुनाव थमने से पहले 25 तक शिव सेना का इस पर कब्जा रहा था। शिव सेना या ठाकरे परिवार की असली ताकत ही मुंबई के निगम पार्षद होते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट को आदेश से बीएमसी सहित महाराष्ट्र के अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं। बरसात खत्म होते ही चुनाव होंगे। लेकिन उससे पहले इस चुनाव में पार्टियों की स्थिति स्पष्ट होने लगी है। ऐसा लग रहा है कि विधानसभा या लोकसभा की तरह महायुति बनाम महाविकास अघाड़ी का चुनाव नहीं होगा।
महाविकास अघाड़ी यानी विपक्षी गठबंधन की पार्टियां अलग अलग चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस के नेताओं ने अलग लड़ने की सलाह पार्टी आलाकमान को दी है और इसका कारण यह है कि उसकी एक सहयोगी शरद पवार की पार्टी का मुंबई में कोई खास आधार नहीं है और दूसरी सहयोगी उद्धव ठाकरे की शिव सेना इस बार राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ मिल कर लड़ने की तैयारी कर रही है। इसलिए कांग्रेस को लग रहा है कि उस गठबंधन में उसे ज्यादा कुछ मिलना नहीं है और उलटे राज ठाकरे की वजह से देश के दूसरे हिस्सों में नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर महायुति यानी भाजपा गठबंधन में शिव सेना नेता एकनाथ शिंदे का असर ठाणे में है, मुंबई में उनका भी ज्यादा असर नहीं है और अजित पवार का पुणे या पश्चिम महाराष्ट्र व मराठवाड़ा में असर है। इसलिए भाजपा भी अकेले ही लड़ने की तैयारी कर रही है।