कांग्रेस पार्टी के नेता अजीब अजीब सी बातें कर रहे हैं। वे राज्यों में अपने सहयोगी दलों को परेशान कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक सांसद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला और राहुल गांधी व अखिलेश यादव की तुलना करते हुए राहुल को बड़ा और महान नेता बताया। इसके बाद एक दूसरे सांसद राकेश राठौड़ आए, जिन्होंने कहा कि सपा को यूपी में लोकसभा की जो 37 सीटें मिली हैं और वह कांग्रेस के कारण मिली हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद हालात बदले और उसका लाभ सपा को मिला। राठौड़ के मुताबिक सपा के नेता उनसे बातचीत में कहते थे कि समाजवादी पार्टी 2024 में पांच सीट जीत जाए तो बड़ी बात होगी। लेकिन सपा 37 सीट जीत गई। हालांकि 17 सीट लड़ कर कांग्रेस क्यों सिर्फ छह सीट जीत पाई इसका जवाब उनके पास नहीं था। लेकिन वे विधानसभा चुनाव में बराबरी की सीटों का समझौता चाहते हैं।
दूसरी ओर तमिलनाडु में कांग्रेस नेताओं ने अलग तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली में आलाकमान के नजदीकी और डाटा डिपार्टमेंट के प्रवीण चक्रबर्ती ने आंकड़ा निकाला कि तमिलनाडु पर सबसे ज्यादा कर्ज है। हालांकि वे जो नैरेटिव बनाना चाहते थे वह फेल हो गया। तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने ही इसका विरोध कर दिया। फिर भी राज्य में कांग्रेस दो खेमे में बंटी हुई है। एक खेमा डीएमके के साथ रहना चाहता है तो दूसरा दबाव बना रहा है कि डीएमके कांग्रेस को सरकार में शामिल करे। उनका कहना है कि केंद्र की कांग्रेस की सरकार में डीएमके की हिस्सेदारी थी। उसके लोग भी मंत्री थे। कांग्रेस का यह धड़ा चाहता है कि अगर डीएमके सरकार में लेने को तैयार नहीं होती है तो कांग्रेस को तमिल फिल्मों के सुपरस्टार विजय की पार्टी टीवीके से तालमेल करना चाहिए। टीवीके का चुनाव प्रबंधन संभाल रहे प्रशांत किशोर का भी ऐसा प्रस्ताव कांग्रेस के सामने है।


