कई जगह इस बात का मजाक बनाया जा रहा है कि कांग्रेस के दो नेता राजेंद्र पाल गौतम और तनुज पुनिया अचानक मायावती से मिलने पहुंच गए थे और मायावती के कार्यालय के बाहर से गार्ड ने उनको लौटा दिया था। पहली नजर में यह मजाक का ही मामला दिखता है। याद करें कैसे पिछले साल विधानसभा चुनाल से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुछ अन्य नेताओं को लेकर राजद सुप्रीम लालू प्रसाद के घर के बाहर पहुंच गए थे और कह रहे थे कि राजद उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल करे। राजद ने गठबंधन नहीं किया। इसके बावजूद ओवैसी की पार्टी के पांच विधायक मुस्लिम बहुल सीटों से चुनाव जीत गए।
ठीक उसी तर्ज पर कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के एससी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने बसपा प्रमुख के ऊपर दांव खेला है। वे तनुज पुनिया के साथ मायावती से मिलने गए। उनको पता था कि मायावती नहीं मिलेंगी। उनको मिलना होगा तो सीधो राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलेंगी। फिर वे गए तो इसका मकसद यह था कि चुनाव से पहले राज्य के दलित मतदाताओं को यह मैसेज दिया जाए कि कांग्रेस उनके हितों का ध्यान रखने वाली पार्टी है और इसलिए वह बसपा से तालमेल करना चाहती है। कांग्रेस के लोग एआई जेनेरेटेड एक पोस्टर भी सोशल मीडिया में शेयर कर रहे हैं, जिसमें बसपा को कांग्रेस का स्वाभाविक सहयोगी बताया जा रहा है। ध्यान रहे जब से मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं तब से कांग्रेस ने दलित राजनीति पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया और दलित वोटों में कांग्रेस की स्वीकार्यता भी बढ़ी है। सो, यह अनायास नहीं था, बल्कि सोचा समझा दांव था।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



