विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की अहम बैठक सोमवार, आठ जून को दिल्ली में होगी। इस बैठक की योजना नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के लिए लाए गए विधेयक को विफल कराने के बाद बनी थी। उस समय एक मोमेंटम विपक्ष का बना था लेकिन पांच राज्यों में हुए चुनाव के बाद व मोमेंटम खत्म हो गया है। विपक्षी की बड़ी पार्टियां चुनाव हार गई हैं और पार्टियों के बीच आपस में सिर फुटौव्वल अलग है। हर पार्टी को दूसरी पार्टी से शिकायत है। एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके ने अपने को विपक्ष की बैठक से अलग कर लिया है। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह बैठक में शामिल हो सकते हैं लेकिन व्यावहारिक रूप से उनकी पार्टी विपक्षी गठबंधन से अलग है। अगले साल पंजाब में चुनाव होने वाले हैं इसलिए भी कांग्रेस और आप एक दूसरे के साथ नहीं दिखना चाहेंगे।
बैठक से पहले यह सवाल है कि पार्टियां आपस में रूठने और मनाने में रहेंगी या आगे का कोई एजेंडा बनेगा? रूठने और मनाने का मामला इसलिए है क्योंकि सीपीएम के नेता कांग्रेस से बहुत नाराज हैं तो ममता बनर्जी भी नाराज हैं और हेमंत सोरेन की काफी गुस्से में हैं। नाराज तो तेजस्वी यादव भी हैं लेकिन उनका अभी कोई खास मतलब नहीं है। अब कांग्रेस के ऊपर जिम्मेदारी है कि वह नाराज पार्टियों को समझाए और आगे की राजनीति के लिए तैयार करे। सीपीएम ने तो कांग्रेस को चिट्ठी लिख कर नाराजगी जाहिर की है। यानी उसकी नाराजगी लिखित है। सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि राहुल गांधी ने केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार में सीपीएम और भाजपा की मिलीभगत का आरोप लगाया था और यह भी कहा था कि इस मिलीभगत के कारण ही तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के खिलाफ ईडी का छापा नहीं पड़ रहा है। ध्यान रहे चुनाव खत्म होने के बाद विजयन और उनकी बेटी के आवास सहित कई ठिकानों पर ईडी की छापा पड़ गया। तब भी सीपीएम ने कहा था कि अब राहुल गांधी इससे खुश होंगे।
राहुल गांधी ने इसी तरह के आरोप पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कांग्रेस पर भी लगाए थे। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के प्रवेश करने और मजबूत होने का रास्ता बनाया। गौरतलब है कि 2006 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और भाजपा मिल कर चुनाव लड़े थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन की नाराजगी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार की घोषणा को लेकर है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने बिना उनसे बात किए प्रणव झा को राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया। उस समय तो जेएमएम ने दूसरा उम्मीदवार देने की भी बात कही थी लेकिन बाद में हेमंत ने सिर्फ एक उम्मीदवार घोषित किया। हालांकि इस मामले में कांग्रेस का कहना है कि पिछले तीन चुनावों से राज्यसभा की सीट जेएमएम के खाते में जा रही थीं। 2020 में हेमंत ने अपने पिता शिबू सोरेन को राज्यसभा भेजा क्योंकि वे 2019 का लोकसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2022 में तो सोनिया गांधी ने बुला कर हेमंत से बात की लेकिन हेमंत ने एकतरफा तरीके से महुआ माजी का नाम घोषित कर दिया। 2024 में हेमंत सोरेन चुनाव के समय जेल में थे लेकिन उन्होंने सरफराज अहमद को अपनी पार्टी से राज्यसभा भेजा क्योंकि उन्होंने हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेने के लिए गांडेय की विधानसभा सीट छोड़ी थी। तभी कांग्रेस का कहना है कि इस बार संख्या ऐसी है कि दोनों सीटों विपक्षी गठबंधन को मिल सकती हैं इसलिए कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित किया। इन तीनों पार्टियों के साथ सोमवार की बैठक में सुलह सफाई होगी।
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