राजधानी दिल्ली में यह काम हो रहा है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में सुरक्षा और खास कर महिला सुरक्षा का हवाला देकर लाखों सीसीटीवी कैमरे लगवाए। अब रेखा गुप्ता की भाजपा सरकार कह रही है कि ये चाइनीज कंपनी के सीसीटीवी कैमरे हैं इसलिए उनको हटाया जाएगा। यह काम शुरू भी हो गया है। एक लाख 40 हजार सीसीटीवी कैमरे उतारे जा रहे हैं। सोचें, 2020 में किसी समय इनको लगाना शुरू हुआ था और 2022 के अंत तक लगाने का काम हुआ था। अब इतनी जल्दी इनको हटाया जा रहा है। इनकी जगह नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। वैसे पूरी दिल्ली में कुल दो लाख 74 हजार से कुछ ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो बहुत कम हैं।
बहरहाल, भाजपा सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि दिल्ली में लगे एक लाख 40 हजार कैमरे एक ही चाइनीज कंपनी हिकविजन के हैं। इनसे जासूसी का खतरा बताया जा रहा है। सोचें, अगर चीन की कंपनी का कैमरा होने की वजह से जासूसी का खतरा है तब तो पूरे देश में इस किस्म का खतरा होगा। भारत में संवेदनशील जगहों पर चीन की कंपनियों के कैमरे लगे हैं। सिर्फ कैमरे ही नहीं, बल्कि दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरण भी चीनी कंपनियों के हैं। भारत में तो ज्यादातर लोगों के हाथ में चीनी कंपनियों के मोबाइल फोन हैं, जिनकी करोडों क्या अरबों तस्वीरें रोज खींची जाती हैं और वीडियो बनाए जाते हैं। अगर चीनी उपकरणों से जासूसी होने का खतरा है तब तो सारे उपकरण बदलने चाहिए। दिल्ली के एक लाख 40 हजार सीसीटीवी कैमरे बदल देने से क्या चीन की जासूसी से छुटकारा मिल जाएगा?
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