हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda का इंतजार लंबा होता जा रहा है। कांग्रेस के बड़े नेता इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि भाजपा एक हफ्ते से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का फैसला नहीं कर पाई लेकिन खुद कांग्रेस डेढ़ महीने से ज्यादा हो जाने के बावजूद अभी तक हरियाणा में नेता विपक्ष नहीं नियुक्त कर पाई है। हरियाणा के चुनाव नतीजे आठ अक्टूबर को आए थे। उसके बाद से नेता विपक्ष की नियुक्ति के प्रयास हो रहे हैं। चुनाव में कांग्रेस जीत नहीं सकी लेकिन बहुत मजबूत विपक्ष के तौर पर उभरी है। उसके 37 विधायक जीते हैं। इसमें बहुमत भूपेंदर सिंह हुड्डा के समर्थकों का। उन्होंने नतीजों के बाद 31 विधायकों की बैठक करके अपनी ताकत दिखा दी थी।
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परंतु कहा जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान इस बार उनको नेता विपक्ष बनाने को तैयार नहीं है। वे 2005 से 2014 तक मुख्यमंत्री रहे थे और 2014 से 2024 तक नेता विपक्ष रहे हैं। यानी पिछले 20 साल की राजनीति उनके ईर्द गिर्द ही घूमती रही है। इस बार कांग्रेस जीत के पूरे भरोसे में थी लेकिन भाजपा ने बाजी पलट दी। कहा जा रहा है कि हुड्डा के कारण जाट और गैर जाट का ध्रुवीकरण हुआ था और उनके कारण ही दलित नेता कुमारी सैलजा ने साथ नहीं दिया था। तभी चेहरा बदलने की बात हो रही है। इस बीच उधऱ चंडीगढ़ में नेता विपक्ष का बंगला खाली कराने की कार्रवाई शुरू हो गई है। अगर जल्दी ही हुड्डा को नेता विपक्ष का दर्जा नहीं मिलता है तो उनको बंगला खाली करना पड़ सकता है।
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