इस बार के आम बजट और उससे पहले आए आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान इस बात पर खूब चर्चा हुई है कि नकदी बांटने की योजनाएं कब तक चलती रहेंगी। आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने इसके आंकड़े दिए हैं। हालांकि एक साल पहले आर्थिक सर्वेक्षण में इस किस्म की योजनाओं की तारीफ की गई थी। इस बार भी इसके कुछ अच्छे बिंदु बताए गए हैं लेकिन यह चिंता भी जताई गई है कि इस किस्म की योजनाओं से राजकोष पर बहुत बोझ बढ़ रहा है और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ साथ सामाजिक विकास की अनेक योजनाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
असल में एक अनुमान के मुताबिक देश की सभी राज्य सरकारें मिल कर सिर्फ महिलाओं के लिए शुरू की गई योजना में हर साल दो लाख करोड़ रुपए बांट रही हें। सोचें, अभी कई राज्यों ने ऐसी योजना शुरू नहीं की है। अगले साल जिन राज्यों में चुनाव होना है उनमें से कई राज्यों में महिलाओं को नकद पैसे देने की योजना नहीं चल रही है। अगर देश के सभी राज्य योजना शुरू कर दें तो यह राशि चार लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। महिलाओं के अलावा दूसरे कई और समूहों को नकद पैसे दिए जा रहे हैं। तभी अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि योजना की घोषणा के साथ ही सनसेट क्लॉज भी लगाया जाना चाहिए। इसमें यह बता दिया जाना चाहिए कि योजना कितने दिन तक चलेगी। उस सीमा के बाद इसे समाप्त कर देना चाहिए। नकद बांटने की योजना के आरक्षण की तरह अनंतकाल तक चलाए रखना देश के लिए ठीक नहीं है।


