शरद पवार इन दिनों बहुत बेचैन हैं। उनको लग रहा है कि उनकी पार्टी टूट सकती है। इसलिए वे टूटने से पहले दोनों एनसीपी का विलय करा कर उसे एनडीए में स्थापित करना चाहते हैं। उनका प्रस्ताव है कि उनके लोकसभा सांसद अगर एनडीए में शामिल हो जाते हैं तो नरेंद्र मोदी की सरकार को लोकसभा में तीन सौ से ज्यादा सांसदों का समर्थन प्राप्त हो जाएगा। अभी एनडीए के 293 सांसद हैं। दिल्ली में भाजपा के नेताओं को यह प्रस्ताव पसंद आ रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पक्ष में हैं कि शरद पवार और अजित पवार की पार्टियों का विलय हो जाए और एनसीपी के सांसदों का समर्थन सरकार को मिल जाए। इससे नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू पर निर्भरता भी कम होगी। लेकिन दूसरी ओर यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस दोनों पार्टियों के विलय के लिए तैयार नहीं हैं। उनको लग रहा है कि इससे उनकी सरकार के ऊपर दबाव बढ़ेगा।
जानकार सूत्रों का कहना है कि अभी महाराष्ट्र सरकार पर कोई दबाव नहीं है। भाजपा के अपने 132 विधायक हैं और बहुमत के लिए सिर्फ 15 विधायकों की जरुरत होती है। एकनाथ शिंदे की शिव सेना के 57 विधायक हैं और अजित पवार की एनसीपी के 40 विधायक हैं। अजित पवार के निधन से एक सीट खाली हुई है। सुनेत्रा पवार वहां से जीत जाएंगी तो उनकी संख्या 41 हो जाएगी। फड़नवीस को लग रहा है कि अगर शरद पवार की पार्टी का विलय हो जाता है तो एनसीपी के भी 51 विधायक हो जाएंगे और साथ में नौ सांसद होंगे। ऐसे में उनकी मोलभाव करने की क्षमता बढ़ जाएगी। राज्य में और केंद्र में दोनों जगह शरद पवार कुछ न कुछ तिकड़म करने की सोचने लगेंगे। अभी वे ऐसा कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं हैं। अजित पवार के निधन की वजह से दोनों पार्टियों के विलय की बातचीत भी थम गई है। प्रफुल्ल पटेल से लेकर छगन भुजबल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे आदि विलय नहीं चाहते हैं।
तभी देवेंद्र फड़नवीस ने भी विलय का विरोध किया है और उसकी जगह शरद पवार की पार्टी तोड़ देने का दांव चलने की तैयारी की है। जानकार सूत्रों का कहना है कि शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और शिरूर सीट के सांसद अमोल कोल्हे को छड़ कर बाकी छह सांसद किसी न किसी तरह से फड़नवीस के संपर्क में हैं। अगर आठ में से छह सांसद टूट जाते हैं तो शरद पवार के पास कुछ नहीं बचेगा। तभी शरद पवार सक्रिय हुए हैं। अजित पवार के निधन के बाद तो उन्होंने दूरी रखी और सुनेत्रा पवार की शपथ में भी नहीं गए। लेकिन पिछले हफ्ते वे लगातार दो दिन सुनेत्रा पवार और उनके दोनों बेटों पार्थ व जय पवार से मिले हैं। बारामती के घर पर पूरे पवार परिवार की मीटिंग हुई है, जिसके बाद शरद पवार के पोते और उनकी पार्टी के विधायक रोहित पवार ने कहा कि परिवार पूरी तरह से एकजुट है। शरद पवार से गौतम अडानी की मुलाकात को भी इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पवार इस समय किसी तरह से पार्टी टूटने से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनको लग रहा है कि अगर पार्टी नहीं टूटती है और एनसीपी का विलय हो जाता है तो वे अपनी बेटी को केंद्र में मंत्री बनवा सकते हैं। अगले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति में दिलचस्प होने वाले हैं। अजित पवार के शोक की 13 दिन की अवधि समाप्त होने का इंतजार सबको है।


