देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का काम चल रहा है। लगभग सभी राज्यों में भाजपा विरोधी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा लग रहा है कि भाजपा को ही इससे समस्या हो रही है। एसआईआर के पहले चरण के बाद जो मसौदा मतदाता सूची जारी हुई उसमें दो करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम कट गए। भाजपा के नेता मान रहे हैं कि इसमें ज्यादातर भाजपा समर्थक मतदाता हैं। यह भी कहा जा रहा है कि शहरी इलाकों की सोसायटियों में रहने वाले लोगों के नाम ज्यादा कटे हैं। इसी वजह से लगातार एसआईआर की समय सीमा बढ़ाई जा रही है। यूपी में चार बार समय का विस्तार हो चुका है।
एक तरफ बड़ी संख्या में नाम कटने की शिकायत है तो दूसरी ओर भाजपा के ही नेता शिकायत कर रहे हैं कि बहुत जगह नामों का दोहराव है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक और योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल ने आरोप लगाया है कि एक ही मतदाता का नाम कई कई मतदान केंद्रों पर दर्ज है। उन्होंने यह शिकायत मसौदा सूची आने के बाद की है। वे वाराणसी उत्तरी सीट के विधायक हैं। उन्होंने 92 सौ ऐसे मतदाताओं की सूची जिला कलेक्टर सह निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपी है, जिनके नाम एक से ज्यादा मतदान केंद्रों पर हैं। इनमें से ज्यादातर नाम मुस्लिम समुदाय के लोगों के हैं और इसलिए विधायक रविंद्र जायसवाल इसे वोट जिहाद बता रहे हैं। बहरहाल, किसी जाति या धर्म के हों अगर एसआईआर करने के बाद फर्जी मतदाता मिलते हैं या एक ही मतदाता का नाम कई जगह दर्ज होता है तो यह एसआईआर की पूरी प्रक्रिया पर बड़ा सवाल है।


